जौनपुर। मूर्ति विसर्जन के लिए गोमती नदी के विसर्जन घाट पर पहुंचे गणेश पूजा समिति के लोगंों को नगर प्रशासन ने रोक दिया। इससे नाराज समिति के लोगों ने प्रशासन के कुंड में मूर्ति विसर्जन करने के आदेश को मना कर दिया। काफी देर तक हुई बातचीत के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकला तो वह मूर्ति लेकर पंडाल लौट गए।
नगर कोतवाली क्षेत्र के बाबा बारीनाथ मठ परिसर में बाल गणेश संस्था की ओर से गणेश प्रतिमा स्थापित की गई थी। सोमवार को पूजा समिति के कार्यकर्ता गाजे-बाजे के साथ मूर्ति विसर्जन के लिए गोमती नदी के विसर्जन घाट पर पहुंचे थे। पूजा समिति के लोग गणेश प्रतिमा को नदी में विसर्जित करना चाह रहे थे। वहां मौजूद पुलिस ने हाईकोर्ट के निर्देश का हवाला देते हुए नदी में प्रतिमा विसर्जन करने से रोक दिया। जबकि पूजा समिति के अध्यक्ष रवी सोनी समेत अन्य कार्यकर्ताओं की दलील थी कि कोर्ट का यह भी निर्देश है कि मूर्ति के बनाने में अगर उसमें पर्यावरण को खतरा पहुंचाने वाले रसायन का उपयोग नहीं हुआ है। समिति के लोगों ने मूर्तिकार की तरफ से दिए गए प्रमाण पत्र को भी पुलिस को दिखाया। इस पर समिति व पुलिस के बीच काफी देर तक कहासुनी होती रही। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे नगर मजिस्ट्रेट इंद्रभूषण वर्मा ने समिति के पदाधिकारियों की इस दलील खारिज कर दिया। उन्होंने मूर्तिकार को अपंजीकृत बताते हुए उसके प्रमाण पत्र को मानने से इंकार कर दिया। इससे काफी देर तक दोनों पक्षों में घाट पर बहस चलती रही। प्रशासन कुंड में विसर्जन का दबाव बना रहा था। जबकि पूजा समिति ने कुंड गंदा होने की बात कहकर विसर्जन से मना कर दिया। आखिरकार पूजा समिति के लोग बिना विसर्जन के ही लेकर चले गए और फिर से पंडाल में रख दिए।