जौनपुर। विकास कार्यों में अनियमितता और शिकायतें जांच में सही पाए जाने के बाद मुख्य विकास अधिकारी ने 32 ग्राम पंचायत सचिवों और नौ सहायक विकास अधिकारियों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। साथ ही 28 ग्राम प्रधानों को नोटिस जारी किया गया है। मुख्य विकास अधिकारी ने ऐसे 42 ग्राम पंचायतों की सप्ताह भर पहले जिला स्तरीय अधिकारियों से जांच की गई थी जहां से अनियमितता की काफी शिकायतें मिली थीं। जांच रिपोर्ट में शिकायतें सही पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई।
मुख्य विकास अधिकारी आलोक सिंह ने विकास कार्यों में अनियमितता, योजनाओं का लाभ अपात्रों को देने और पैसा लेने आदि की शिकायतें मिलने पर ऐसे ग्राम पंचायतों को चिह्नित कराया था। इस दौरान कुल 42 ग्राम पंचायतें चिह्नित की गईं। इसके बाद 25 व 26 अगस्त को जिला स्तरीय अधिकारियों को तैनात कर जांच कराई गई। अधिकारियों ने जांच कर अपनी रिपोर्ट सीडीओ को सौंप दी। जांच में गोनापार, बरीबारी, कसेरवां, कटहरी, रीठी, पिलकिथुआ, बहरीपुर, मछलीगांव, किशुनपुर, नरायनडीह, अमोध, नोकरा, उत्तरपट्टी, पराहित, बेलौनाकला, ताखापूरब, बिशेषरपुर, सिंधाई, बरैयाकाजी, उत्तरपट्टी, रासीपुर, कोल(पूराबलई), गढ़ाबाघराय, कुसरना, बशीरपुर, हौज, असबरनपुर, सलेमपुर, महरेव, रामपुर सोइरी, हुसैनाबाद, गगौरा व बोड़सर गांव में विकास कार्यों में अनियमितता पाई गई। इसपर सीडीओ ने इन ग्राम पंचायतों के 32 ग्राम पंचायत सचिवों और नौ सहायक विकास अधिकारियों का वेतन रोक दिया है। साथ ही 28 ग्राम प्रधानों को नोटिस जारी किया है। सीडीओ आलोक सिंह ने बताया कि जांच के बाद आई रिपोर्ट में विकास कार्यों में अनियमितता होने, अपात्रों को योजनाओं का लाभ देने आदि कमियां मिलीं। इस पर यह कार्रवाई की गई है।
उधर, मछलीशहर सांसद रामचरित्र निषाद के आदर्श गांव आरा में भी जांच के दौरान विकास कार्यों में अनियमितता पाई गई। प्रधानमंत्री आवास व शौचालय आदि का लाभ देने के लिए सुविधा शुल्क लेने की शिकायतें मिली थी। इसको गंभीरता से लेते हुए मुख्य विकास अधिकारी आलोक सिंह ने ग्राम पंचायत सचिव को निलंबित कर दिया है। साथ ही ग्राम प्रधान व उनके पुत्र के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराया गया है। यहां भी शिकायत मिलने पर सीडीओ ने तीन सदस्यीय टीम गठित कर 34 प्रोजेक्टों के कार्यों की जांच कराई थी।