माना जा रहा है कि तालाब में गंदगी अधिक होने से पानी में आक्सीजन की कमी के चलते यह स्थिति बन रही है। एहतियात के तौर पर तालाब में चूने का छिड़काव किया गया और पानी की ऊपरी सतह पर जमा कई को छानकर बाहर निकाल दिया गया।
मंदिर के पुजारी बाबा अवधू राम ने बताया कि सुबह तालाब में दो चार मछलियां उतराई हुई मिलीं। जैसे-जैसे समय बीतता गया वैसे-वैसे मछलियों के मरने की संख्या भी बढ़ती गई। दोपहर दो बजे तक करीब 150 से अधिक मछलियां मर गईं। मरने वाली प्रत्येक मछली का वजन 8 से 10 किलो के बीच रहा।
इस हिसाब से करीब 15 क्विंटल मछलियां दूषित पानी का शिकार हो कर मर गई। पुजारी की मानें तो पहले आशंका जताई गई कि किसी ने तालाब में जहर डाल दिया होगा। लेकिन बाद एक एक कर मर रही मछलियों से अंदाजा लगाया गया कि पानी में आक्सीजन की कमी के चलते ही मछलियां मर रही हैं। उधर, जब तालाब में मछलियों के मरने की खबर मिलते ही ग्रामीण भी वहां पहुंचे और स्थिति की जानकारी ली। ग्रामीणों ने तालाब की साफ सफाई कराए जाने की मांग की। कहा कि लगातार गंदे हो रहे पानी ने मछलियों को नुकसान पहुंचाया है।