केराकत। अक्षर आरसी साहित्य समिति द्वारा शनिवार की रात केराकत बाजार में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें कवियों ने अपनी रचनाएं सुनाकर वाहवाही बटोरी।
कवि सूबेदार ने लालच का चारा फेकात बा प्रजातंत्र कमजोर भईल, का भयवा सुतलय रहबा उठ जाभयवा देर भईल को सुनाकर चुनावी मौसम को इंगित किया। इसी क्रम में मौलाना इकबाल ने अपनी नज्म खामोश है लब झुकी है पलकें, दिलों में उलफत नई -नई है को सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। कारी असलम ने क्यों भीख भव मांगते हो गुनहगार की तरह, हक चाहिए तो छीन लो हकदार की तरह पर सुनाकर लोगों से खूब तालियां बजवाया। रमेश चंद सेठ की कविता मेरी चाहत का कुछ तो सिला दीजिए, एक बार बस मुस्करा दीजिए को लोगों ने खूब सराहा। डा. बहादुर अली खान मिनाई ने अभी तक जिंदगी में ऐसा कोई मकां नहीं आया, जहां मेरी जबां पर तेरा नाम नहीं आया को सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। इस अवसर पर साहेब सहज, बृजेश लहरी, गुलाम सर्वर, पवन कुमार पांडेय, नंदलाल समीर रामधारी आनंद, उमाशंकर सिंह, श्रीपति सिंह गौतम, गुल्ली पान्डेय आदि कवियों की रचनाओं को श्रोताओं ने खूब सराहा। कार्यक्रम का शुभारंभ पवन पान्डेय के सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता मदन मोहन शुक्ल व संचालन डा. बहादुर अली खान ने किया।