थानागद्दी। क्षेत्र के ग्राम पंचायत भैंसा स्थित साहब लाल यादव के आवास पर अक्षर आरसी के बैनर तले सोमवार को कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन किया गया। जिसमें कवियों ने देर रात तक गजल, गीत व नज्म के माध्यम से सभी को बांधे रखा। सामाजिक एवं राजनैतिक परिदृश्य उकेरा वहीं हास्य व्यंग्य की फुलझड़ियां छोड़ श्रोताओ को खूब गुदगुदया। पवन पांडेय की सरस्वती वंदना हे वाग्देवी प्रणम्यहम और जनाब इकबाल ने अपने रब के समनवा हो हमहूं जइबै मदीना नबी की बारगाह में आरजू पेश कर कार्यक्रम की शुरुआत की। गुलाम सरवर की नज्म जो अपनी हदो से गुजरते नहीं है, कभी टूटकर वो बिखरते नहीं है को सभी ने खूब सराहा। सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करते हुए पवन पांडेय ने जब सुनाया कि नशा उन्मूलन अभियान चलउता योगी जी यू पी से दारू हटउता तो श्रोता देर तक ठहाके लगाए। उमाशंकर रघुबंशी ने बेटियों को समर्पित कविता कुछ यूं पढ़ा जिस घर में बिटिया नहीं वो घर है रेगिस्तान तो लोग बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की ओर सोचने को मजबूर हो गए। संचालक डा. बहादुर अली खान मीनाई ने सूफियाना अंदाज में जब बालम मयखाना तो क्या काबा क्या काशी है और जीने का जब न हो कोई मकसद वो जिंदगी वशर न करना पेश किया तो कलाम की रवानी का लोगों ने तहे दिल से इस्तकबाल किया। साहब लाल सहज ने होलियाना अंदाज में होली आई त फगुआ खेलइबै करी सुनाया। बृजेश लहरी ने गांव की महिमा और बसंत ऋतु का बखान इन शब्दों में पिरोया कुहूकत कोयलिया बा अमवा के डरिया बा चहकत चिरैया होत भोर, हे सखिया चला चली गउआँ की ओर सुनकर सभी मन्त्र मुग्ध हो गए। फनकार मुन्ना घायल, सूबेदार पांडेय, दिनेश दिनकर व डा. मीनाई ने अपनी-अपनी कविताएं सुनाई। अध्यक्षता पूर्व प्रधानाचार्य मदन मोहन शुक्ल और संचालन डा. बहादुर अली खान मीनाई ने किया। इस मौके पर जगदीश पाठक, नरेंद्र पांडेय, अशोक पांडेय, बिरजू यादव, शोभनाथ यादव, संजय सिंह, लाला यादव तथा समरजीत यादव आदि उपस्थित रहे।