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अटूट है भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता

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गौराबादशाहपुर। कथा वाचक पंडित वेदप्रकाश तिवारी ने कहा कि जीवन में कितने ही संकट आये परन्तु दृढ़ता के साथ भक्ति में लगा रहना चाहिए। जिस तरह की भक्ति सुदामा ने किया उससे सभी को सीख लेना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने स्वत: उनकी सेवा किया। बस भक्ति में प्रेम का वास होना चाहिए। जीवन मरण सत्य है। कलयुग में जन्म - मृत्यु के बंधन से मुक्ति के लिए हरिनाम का कीर्तन जरूरी है। प्रभु का सुमिरन ही भव सागर से पार लगाएगा। भक्त को खुद भक्ति भावना में समर्पित कर लेना चाहिए। आचार्य सूरज तिवारी, लोकेश पांडेय और शिवशंकर चौबे ने हवन पूजन का कार्य संपंन कराया। श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह की झांकी भी प्रस्तुत की गयी। इस अवसर पर मुख्य यजमान दुर्गावती देवी, राम प्रवेश सैनी, शिव सहाय, मोहन, रमेश, धीरज, अनुज, प्रशांत आदि उपस्थित रहे।
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