बदलापुर। वृंदावन धाम से पधारे पंडित कृष्णकांत महराज ने कहा कि कलियुग में माया प्रबल हो चुकी है। मनुष्य भगवान को छोड़कर माया के पीछे भाग रहा है। ऐसे में वह बंधन में जगड़ जा रहा है। मानव को अपना जीवन सुधारने के लिए भागवत कथा श्रवण करना चाहिए। वह सोमवार को भलुआही गांव में चल रही संगीतमयी भागवत कथा में भक्तों को कथा का रसपान करा रहे थे।
उन्होंने भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और श्रीकृष्ण जन्म महोत्सव की कथा बड़े ही रोचक तरीके सुनाया। जिसे सुम श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। उन्होंने कहा कि ययाति के बड़े पुत्र यदु हुए। उन्हीं के वंश में भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्णपक्ष अष्टमी को रात्रि 12 बजे रोहिणी नक्षत्र में हुआ। भगवान कृष्ण ने संसार को अंधेरे से प्रकाश में लाने के लिए जन्म लिया और अज्ञान रूपी अंधकार को ज्ञानरूपी प्रकाश से दूर किया। भगवान कृष्ण को जब वसुदेव यशोदा मैया के घर लेकर जा रहे थे तो, शेषनाग ने छाया की और गंगा माता ने चरण छुए। कृष्ण को नंदबाबा के घर छोड़कर यशोदा मैया की कन्या को लेकर वापस कंस के कारागृह में आए। कथा में कृष्णोत्सव मनाया गया और पूतना उद्धार की कथा सुनाई गई। कथा में जैसे ही भगवान का जन्म हुआ पूरा पंडाल %नंद के आनंद भयो जय कन्हैयालाल की% के जयकारों से गूंज उठा। कथा में वैभव सिंह ने बासुदेव और उद्देश्य सिंह ने बावन भगवान की भूमिका निभाई। इस अवसर पर डा. प्रमोद मिश्र, दयाशंकर त्यागी, संजय सिंह, गुलाब सिंह, हितेंद्र, अनिल सिंह, आर्यन निगम, पवन पाण्डेय, बबलू सिंह, राज बहादुर यादव, माता प्रसाद उपाध्याय, छोटू सिंह, अवनीश सिंह, आदि उपस्थित रहे। कथा के आयोजक मुख्य यजमान उन्नत सिंह ने श्रद्धालुओं के प्रति आभार ज्ञापित किया।