बदलापुर। ब्रिटिश हुकूमत के दौरान बदलापुर थाने के सामने पशुओं के ठौर के लिए बने पवन घर का अस्तित्व तीन दशक पूर्व जिला पंचायत द्वारा दुकान बनवाकर समाप्त कर दिया गया। अगर पवन घर इस समय रहता तो छुट्टा पशुओं को उसमें रख दिया जाता। जिससे किसानों की फसलें नुकसान होने से बच जाती।
बदलापुर तहसील क्षेत्र में छुट्टा पशु इस समय किसानों के फसलों की क्षति कर रहे हैं। जिससे किसानों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। वहीं फसलों के नुकसान की चिंता किसानों के चेहरे पर आसानी से देखी जा सकती है। लेकिन इन पशुओं को कहां रखा जाए। इसको लेकर किसान चिंतित हैं। हालत यह है कि बदलापुर थाने के सामने पशुओं के ठौर के लिए बने पवन घर का अस्तित्व तीन दशक पूर्व जिला पंचायत ने दुकान बनवाकर समाप्त कर दिया। जबकि ठेकेदारी व्यवस्था के अंतर्गत जिला पंचायत ने उस पवन घर का दायित्व इलाके के ग्राम बरौली निवासी श्री सिंह को सौंपा था । पशुपालक का कोई पशु किसी किसान की फसल क्षतिग्रस्त करता था तो किसान उस पशु को सीधे पवन घर लाता था। जब पशुपालक अपने पशु को छुड़ाने आता था तो भूसा,चारा व पानी का दाम जोड़ कर पैसा लिया जाता था। इसके बाद पशु को रिहा कर दिया जाता था। स्थित यह है कि क्षेत्रीय किसानों को अब उस पवनघर की चिंता सता रही है। चूंकि इस समय किसानों की फसल आवारा पशुओं द्वारा क्षतिग्रस्त की जा रही है। यदि पवनघर की स्थित जस की तस बनी रहती तो आज ऐसे पशुओं का बसेरा पवन घर में होता। इस संबंध में किसान अमरबहादु सिंह, शिवाजी दुबे , रामजीत पांडेय , डा. प्रमोद मिश्र, अमलधारी सिंह आदि का कहना है कि आज यदि पवन घर होता तो आवारा पशु का बसेरा वहीं होता। जिससे किसानों की फसलें नुकसान नहीं होती।