जौनपुर। सत्ता का संग्राम शुरू हो गया है। लोग दल और व्यक्तित्व पर चुनाव में अपना सांसद चुनना चाहते हैं। कुछ लोग जहां ऐसा सांसद चाहते हैं कि उसे राजनीति की समझ हो और देशहित में कार्य करता हो। वहीं कुछ लोग विकास करने वाला सांसद चाहते हैं। इसको लेकर समाज के विभिन्न वर्ग के लोगों से बात की गई, जिन्होंने अपने विचार रखें।
- पूर्वांचल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डा. मानस पांडेय का कहना है कि भारतीय लोकतंत्र में संसद में जाने वाले सांसदों का एक अपना महत्व है। सांसद उस व्यक्ति को होना चाहिए जिसे समाज, देश की समझ हो। समाज, क्षेत्र, देश की समझ रखने वाले राजनीति व्यक्तियों का सांसद होना चाहिए।
- युवा चिकित्सक डा. आयुष उपाध्याय का कहना है कि हम सभी के क्षेत्र का सांसद क्षेत्र के विकास के लिए हमेशा अग्रसर रहने वाला हो। युवाओं की सोच के अनुसार व्यवहार करने वाला हो और क्षेत्र के विकास को महत्व देता हो। सांसदों को अपने किए गए कार्यों के कर्तव्य का ज्ञान होना आवश्यक है। जिससे की उनके कृत्य से संसद की गरिमा प्रभावित न हो।
- गृहणी ममता का कहना है कि सांसद पढ़ा लिखा और जमीन से जुड़ा हुआ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सांसद में लोगों की समस्याओं को समझने की क्षमता हो और उसे निराकरण कर सके। सांसद क्षेत्र का प्रतिनिधित्व संसद में करता है। ऐसे में उसकी आवाज उसके लोकसभा क्षेत्र की आवाज होती है। महिलाओं के हित पर ध्यान देने वाला सांसद होना चाहिए। ताकि वह उनकी आवाज बन सके।
- पूर्व प्रशासनिक अधिकारी अशोक चक्रवर्ती का कहना है कि हमें सांसद ऐसा चाहिए जो शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति गंभीर हो। सांसद को बड़ा काम करना चाहिए। आज भी नर्सरी स्कूलों में बेतहाशा फीस है। ऐसे में सरकारी शिक्षा की व्यवस्था बेहतर हो, स्वास्थ्य बेहतर हो तो लोगों को सुविधा मिलेगी। हमें सांसद ऐसा चाहिए जो लोगों की आवाज बन सके। उनका दर्द समझ सके।