बदलापुर । डा. मदन मोहन मिश्र ने रामजानकी मंदिर परिसर में राम कथा के दूसरे दिन रविवार को कहा क़ि प्रभु की भक्ति के लिए ज्ञानी होना जरूरी नहीं है। बस अनुराग होना चाहिए। राग से सांसारिक वस्तुएं तो अनुराग से प्रभु की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि मानव तन बड़ी मुश्किल से मिला है। अगर यह शरीर पाकर भी आवागमन के बंधन से मुक्त नहीं हुए तो फिर चौरासी लाख योनियों में भटकना पक्का है। प्रभु की भक्ति के लिए ज्ञानी होने के बजाय प्रभु के चरणों में अनुराग जरूरी है। अगर ऐसा नहीं होता तो केवट, शबरी, जटायु को कहां प्रभु के दर्शन होते और निर्मल भक्ति का वरदान मिलता। दयालु प्रभु के लिए भक्तों का हित सर्वोपरि है। कार्यक्रम का संचालन डा. विजय शंकर तिवारी ने किया। अंत में आयोजक महंथ सर्वेश ने आगंतुकों के प्रति आभार ज्ञापित किया।इस अवसर पर सुरेंद्रमणि दूबे, पूर्व प्रधानाचार्य राजनाथ उपाध्याय, संतोष सिंह, उपेंद्रमणि त्रिपाठी, अवनीश पांडेय, उमेश चंद्र द्विवेदी, ब्रह्मदेव निगम आदि उपस्थित रहे।