बदलते मौसम के कारण अस्पतालों में उल्टी, दस्त और बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। जिला अस्पताल में इलाज के लिए 1143 मरीज पहुंचे। गर्मी का सीधा असर लोगों के शरीर पर पड़ रहा है। त्वचा संबंधी बीमारी के मरीज भी पहुंच रहे हैं।
उमस भरी गर्मी से जिला अस्पताल में ज्यादातर मरीज उल्टी, दस्त और पेट दर्द के पहुंच रहे हैं। सोमवार को अस्पताल मरीजों से पट गया। इसमें कुछ मरीजों को भर्ती कर इलाज करना पड़ा। डॉक्टर की मानें तो डायरिया एक जलजनित बीमारी है। गर्मी बढ़ते ही लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए कहीं से भी पानी पी लेते हैं। इस मौसम में हमेशा साफ पानी या पानी को उबाल कर ही पीना चाहिए। सीएमएस डॉ. केके राय ने बताया कि गर्मी में बच्चों का खास ख्याल रखने की जरूरत है। बच्चे को दूषित पानी या फिर बाहर दुकान की बनी चीजें ना खाने दे। साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। गर्मी से बचाव के लिए बच्चों का ख्याल रखना चाहिए। जैसे ही उल्टी, सिरदर्द आदि के लक्षण दिखे तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। अस्पताल में 30 से 40 लोग रोजाना आ रहे हैं। जिन्हें इसकी शिकायत है। प्राइवेट अस्पतालों में भी मरीजों की भीड़ लग रही है। मौसम में उतार चढ़ाव से बीमारियां तेजी से बढ़ती है।
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तेजी से फैलता है संक्रमण
तेज धूप और गर्मी के मौसम में संक्रमण तेजी से फैलता है। बैक्टीरिया आदि जीवाणु की संक्रमण क्षमता बढ़ जाती है। इसका मुख्य कारण वातावरण और जलवायु में बदलाव है। सर्दी जुकाम और वायरल जैसे रोग आसानी से शरीर को घेर लेते हैं। इस मौसम में ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक और एसी लोगों की सेहत बिगाड़ रही है।
वर्जन
तेज धूप और गर्मी में पसीने से भीगते हुए कहीं से आने के बाद सीधे पंखा, एसी और कूलर के नीचे बैठ जाते हैं। बाहर से आने के बाद फ्रिज का ठंडा पानी भी पी लेते हैं। इससे सर्द गर्म होने का खतरा बढ़ जाता है। शरीर ठंडी होने के बाद ही पानी पीना चाहिए।
-डॉ. अशोक कुमार यादव, फिजिशियन जिला अस्पताल जौनपुर