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30करोड़ खर्च कर खोदे गए तालाब खुद हैं प्यासे

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जौनपुर। जल संचयन के महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत दो हजार तालाब खोदे गए लेकिन किसी में पानी नहीं है। पानी के अभाव में छह मोरों की मौत हो गई। दूसरे पशु - पक्षियों के सामने भी पेयजल संकट है। मगर प्रशासन ने उनमें पानी भरवाने की जरूरत नहीं समझी।
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मनरेगा की शुरुआत 2006 में हुई थी। इस योजना के तहत जल संचयन के लिए तालाबों की खुदाई कराई गई। हर वर्ष लगभग 100 से अधिक तालाबों की खुदाई की जाती रही। अब तक जिले में दो हजार तालाब खोदे गए हैं। इन तालाबों को खोदने में लगभग 30 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। यह तालाब इस समय अपने उद्देश्य विहिन पड़े हुए हैं। वे सूखे पड़े हैं। पारा 36 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया है और तेज धूप हो रही है। ऐसे में पशु-पंछी पानी के लिए भटक रहे हैं। पानी की कमी के चलते जिले में छह मोरों की मौत हो गई। बावजूद इसके अभी तक इन तालाबों में प्रशासन द्वारा पानी नहीं भरवाया गया है।
केराकत तहसील क्षेत्र में 456 में 364 तालाबों में धूल उड़ रही है। केवल 92 तालाबों में थोड़ा बहुत पानी है। खुटहन क्षेत्र के इमामपुर गांव में 9 लाख रुपये खर्च करके दो साल पहले तालाब खुदवाया गया लेकिन उसमें पानी ही नहीं भरा गया। बदलापुर की 85 ग्राम पंचायत में 183 तालाबों खोदे गए लेकिन किसी में पानी नहीं है। मडियाहू विकासखंड के 32 तालाब हैं, जो सूखे हैं। जाफराबाद के सिरकोनी विकासखंड में मनरेगा के तहत 173 तालाब खोदे गए हैं। किसी में पानी नहीं है। विकास खंड शाहगंज क्षेत्र के गुरैनी, मनेच्छा, मानीकलां, लेदरहि व पोराई गांवों के तालाब सूखे पड़े हैं।
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कोट:
तालाबों में पानी जल्द भरवाया जाएगा। पहले उन तालाबों में पानी भरवाया जाएगा, जो या तो नहर के किनारे हैं या फिर ट्यूबवेल के पास हैं।
गौरव वर्मा
मुख्य विकास अधिकारी
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