जौनपुर। प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को दिए गए अंक पत्र में नाम का कालम न होने के कारण शिक्षक रिपोर्ट कार्ड के ऊपर कलम से ही नाम लिखकर दे दे रहे हैं। इससे छात्रों को कोई खास दिक्कत भले न हो लेकिन भविष्य में जहां भी कहीं उन्हें कक्षा एक से लेकर पांचवीं तक का अंक पत्र दिखाने की जरूरत पड़ेगी तो उनके अंकपत्र को असली होने की विश्वसनीयता संदेह हो सकता है। ऐसे में छात्रों को सफाई देनी पड़सकती है कि उनका अंकपत्र असली है। शिक्षा विद् डा. ब्रजेश कुमार यदुवंशी कहते हैं कि लाखों खर्च के बाद भी बच्चों के अंक पत्र में खामियां दिखें तो यह ठीक नहीं है। ऐसे में प्राइमरी के बच्चे अपने को कैसे कान्वेंट विद्यालयों के बच्चों के समांतर महसूस करेंगे।