जौनपुर। ‘सावधान! आप कैमरे की नजर में हैं।’ अगर आप जौनपुर में हैं तो इस वाक्य का कोई मायने नहीं है। कैमरे लगे हैं। अव्वल तो ज्यादातर कैमरे खराब हो गए हैं और जो ठीक हैं, उनके फुटेज पर कोई नजर नहीं रखता।
शहर में 100 स्थानों पर सीसी कैमरों की जरूरत है। शहर में लोगों के सहयोग से 50 से अधिक कैमरे लगवाए गए हैं। इन कैमरों को स्थानीय थाने से जोड़ा गया था। मगर उस पर निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं हुई। नियमित देखभाल नहीं होने के कारण उनकी हालत खराब हो गई है। तमाम कैमरे तो देखरेख के अभाव में खराब हो हैं। जो कैमरे काम कर रहे हैं, उनका न तो एंगल ठीक है और न ही क्वालिटी। कैमरों की उपेक्षा की हालत यह है कि पुलिस के पास इसकी जानकारी तक नहीं है कि कितने कैमरे काम कर रहे हैं और कितने खराब हैं। कोई वारदात हो जाए तो पुलिस दुकानों के कैमरे के फुटेज मांगती है। लाइन बाजार इलाके में पचहटिया चौराहे पर तीन कैमरे लगाए गए थे, जो बंद है। यहीं हालात कोतवाली क्षेत्र के चहारसू, ओलंदगंज, आदि स्थानों की है। वैसे नए स्थानों पर कैमरे लगाएं जाने की कवायद एक बार फिर से शहर एवं थानों में शुरू हो गई है। सोमवार को सराफा कारोबारियों के साथ बैठक कर इंस्पेक्टर लाइन बाजार संजीव मिश्रा ने दुकानों के सामने सीसी कैमरे लगवाने की अपील की थी।
जल्द ही आधुनिक सीसीटीवी कैमरें जिले के सभी थानों में लगाएं जाएंगे। सभी थाना क्षेत्रों में कम से कम 10 हाई डेफिनेशन कैमरे लगवाने की योजना है। जो कैमरे लगे हैं, उनका विवरण जुटाया जा रहा है। उन्हें ठीक कराया जाएगा। मानीटरिंग की भी व्यवस्था की जाएगी। -आशीष तिवारी, पुलिस अधीक्षक