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महिलाओं के प्रति समाज को बदलना होगा नजरिया:

Tue, 18 Dec 2018 11:48 PM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क,अमर उजाला,जौनपुर
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बदलापुर स्थित टीडी कॉलेज में मंगलवार को आयोजित अमर उजाला अपराजिता सजगता संगोष्ठी को संबोधित करते हुए अंग्रेजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. वंदना दुबे ने कहा कि देश व समाज के विकास की कल्पना तब तक पूरी नहीं हो सकती है जब तक महिलाओं के विरुद्ध हिंसा और अपराध पर पूर्ण रूप से रोक न लग जाए। यह तभी संभव है जब पुरुष अपनी मानसिकता को बदलें व सदियों पुरानी रूढ़ियों से समाज को होने वाले नुकसान को समझें।
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संगोष्ठी में 257 छात्राओं ने अपराजिता का शपथ पत्र भरा। डॉ. वंदना ने कहा कि महिला और पुरुष दोनों को अपने संकीर्ण विचारों को त्यागते हुए स्वच्छ समाज के निर्माण में तत्पर होना चाहिए। अपराजिता कार्यक्रम इस दिशा में एक सार्थक पहल है, जो महिलाओं की खामोशी को आवाज देने का सकारात्मक प्रयास सफलता पूर्वक कर रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति समाज को अपना नजरिया बदलना होगा और महिलाओं को भी अपने अस्तित्व को समझना होगा।

हालांकि महिलाएं शुरू से ही घरेलू हिंसा का शिकार रही हैं। यदि देखा जाए तो गर्भ से ही महिलाओं के प्रति समाज की शोच ठीक नहीं है, जो महिलाओं में हीन भावना बढ़ा रही है। चाहे वह घर में पढ़ाई का मामला हो या घर से बाहर निकलने की आजादी का। डॉ. छाया सिंह ने कहा कि महिला सशक्तीकरण पुरुष और महिला की साझा जिम्मेदारी है। यह समाज का नैतिक दायित्व है कि महिला की इज्जत करे। इसी में दोनों की गरिमा निहित है।
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डॉ. रीता सिंह ने कहा कि इस तरह की परिचर्चा अनवरत होनी चाहिए, जिससे हमारी लड़कियों का सशक्तीकरण हो। डॉ. गीता सिंह ने कहा कि लड़कियों को उच्च शिक्षा में बढ़ते हुए समाज के प्रति सकारात्मक जिम्मेदारी निभानी चाहिए। हिंदी विभाग की प्रोफेसर डॉ. सुषमा सिंह ने कहा कि इस तरह के आयोजन से महिलाओं को अपनी बात कहने के लिए साहस मिलता है।
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