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शहर के 10 हजार घरों तक नहीं पहुंच पा रहा पानी....

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जौनपुर। शहर के दस हजार घरों में अब तक शुद्ध पेयजल नहीं पहुंच पाया है। पाइप लाइन बिछाने में देरी के चलते इन घरों के लोग पेयजल के लिए निजी और सरकारी हैंडपंपों के सहारे ही प्यास बुझाने को मजबूर हैं। अमृत योजना में धीमी कार्य गति से इस बार की गर्मियों में भी इन घरों को शुद्ध पानी मिल पाना संभव नहीं दिख रहा। योजना के तहत प्रभावित इलाकों में पाइप लाइन बिछाकर कनेक्शन देने के लिए जून तक डेडलाइन तय की गई, मगर अब 20 फीसदी काम भी पूरा नहीं हो पाया है।
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तीन लाख आबादी वाले इस शहरी क्षेत्र में 36, 616 घर हैं। इसमें से महज 26 हजार घरों तक ही पाइप लाइन कनेक्शन पहुंच पाया है। शेष घरों में नगर पालिका की ओर से पानी पहुंचाने का कोई इंतजाम नहीं है। इन घरों के लोग निजी और सरकारी हैंडपंपों के ही सहारे हैं, जिनके पानी की गुणवत्ता पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं।
गर्मी के दिनों में हैंडपंपों के साथ छोड़ने के बाद यहां पानी के लिए हालात विकट हो जाते हैं। कई क्षेत्रों में टैंकर से भी पानी पहुंचाने की नौबत आ जाती है। पाइप लाइन कनेक्शन से वंचित इलाकों में ज्यादातर शहर के बाहरी हिस्से और नए वार्ड शामिल हैं। शासन की अमृत योजना के तहत जल निगम को इन क्षेत्रों में भी पाइप लाइन बिछाकर घर-घर कनेक्शन देने का निर्देश दिया गया है। इसकी योजना तो तैयार हो गई, लेकिन काम की सुस्ती के चलते प्रभावित लोगों को इस गर्मी तक भी पानी की किल्लत से निजात मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही। नई पाइप बिछाने, ओवरहेड टैंक बनाने, कनेक्शन देने के लिए 28 करोड़ की परियोजना स्वीकृत की गई है। इसमें अब तक 20 फीसदी काम ही पूरा हो पाया है।
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जिन घरों में पेयजल कनेक्शन नहीं है, उन्हें कनेक्शन देने के लिए पाइप लाइन बिछाने का कार्य चल रहा है। ओवरहेड टैंक, ट्यूबवेल का निर्माण भी जारी है। पूरी कोशिश है कि जून की तय समय सीमा तक काम पूरा कर शहरी क्षेत्र में आपूर्ति शुरू करा दी जाए। -सुनील कुमार यादव, अधिशासी अभियंता, जल निगम।
अमृत योजना से यह होने है कार्य
अमृत योजना के तहत जिन घरों में पेयजल नहीं पहुंच रहा है, वहां पानी पहुंचाने के लिए पुलिस लाइन में एक हजार किलो लीटर और बलुआघाट में 600 किलोलीटर की पानी टंकी बनाई जा रही है। वहीं पांच ट्यूबवेल पुलिस लाइन, किला सहित बलुआघाट से लेकर पचहटियां में लगाने के लिए स्थानों का चयन कर लिया गया है।
कैंपर और टैंकर के पानी से बुझती है प्यास
पेयजल कनेक्शन से वंचित परिवार प्यास बुझाने के लिए डिब्बाबंद पानी पर निर्भर हैं। शहर की कॉलोनियों और बाहरी मोहल्लों में रोजाना सैकड़ों कैंपर पानी की आपूर्ति हो रही है। गिनती के परिवारों को छोड़ दें तो हर घर में कैंपर के पानी की खपत हो रही है। गर्मी के दिनों में निजी हैंडपंपों के साथ छोड़ने के बाद नहाने-धोने सहित कार्यों के लिए भी पानी की समस्या उत्पन्न हो जाती है। तब सरकारी हैंडपंपों पर कतारें लगती हैं। कई बार तो टैंकर से पानी पहुंचाने की नौबत आ जाती है।
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