आटा। बीस दिन से पेयजल संकट झेल रहे लोगों ने बुधवार को आटा-इटौरा मार्ग को जाम कर दिया। लगभग सात घंटे तक सैकड़ों वाहन जाम में फंसे रहे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझाने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने बात नहीं मानी। मौके पर पहुंचे एसडीएम के आश्वासन के बाद लोगों ने जाम खोला। पेयजल संकट को लेकर लोगों ने 20 दिन में दूसरी बार जाम लगाया है।
कस्बा में रोड किनारे बसी बस्ती में पिछले दो माह से पानी की समस्या बनी हुई है। ओवरलोड ट्रकों के निकलने से पानी की सप्लाई की मुख्य लाइन बीस दिन पहले टूट गई थी। इसकों लेकर ग्रामीणों ने आटा-इटौरा मार्ग पर जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन किया था। 15 दिन पहले दूसरी पाइप लाइन बिछाने के लिए कर्मचारियों को भेजा गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि कर्मचारी धीमी गति से पाइप लाइन बिछा रहे हैं जिससे कुछ ही घरों में पानी की सप्लाई पहुंची है। सैकड़ों घर अभी भी पानी के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।
बुधवार सुबह छह बजे सैकड़ों की तादाद में महिलाएं और पुरुष खाली बर्तन लेकर आटा-इटौरा मार्ग पर जाम लगाकर धरना देन लगे। जिससे वाहनों की लंबी कतार लग गई। जानकारी पर पहुंचे एसडीएम कालपी अभिषेक कुमार ने लोगों को समझाया तब कहीं जाकर जाम खुल सका। एसडीएम कालपी अभिषेक कुमार ने बताया कि आटा के ग्रामीणों की पानी की समस्या जल्द ही खत्म हो जाएगी। हर घर तक पानी की सप्लाई पहुंचेगी।
सात घंटे तक लगे जाम में रोडवेज और स्कूली बस भी फंस गई। भीषण गर्मी में बच्चे बिलबिला गए। ग्रामीणों ने किसी तरह स्कूली बस को गांव के अंदर से होकर निकाला। वहीं, जाम में फंसी रोडवेज बस के यात्रियों को पानी के लिए भटकना पड़ा।
जोल्हूपुर रेलवे क्रासिंग पर ओवर ब्रिज का निर्माण चल रहा है। इसके चलते वहां से भारी वाहनों के आवागमन पर पाबंदी है। कदौरा की तरफ से बालू से भरे ट्रक भी आटा-इटौरा मार्ग से गुजरते हैं। जाम में कई ओवरलोड वाहन फंस गए। जानकारी पर खनिज विभाग के एमआई मुकेश कुमार मिश्रा पहुंचे और जाम में फंसे बालू लदे 16 ओवरलोड ट्रकों का चालान किया।