उरई। जिले के माध्यमिक विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा के शिक्षकों की कमी होने से छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण में परेशानी हो रही है। बता दें कि जिले के 12 माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाई के साथ व्यावसायिक शिक्षा भी दी जाती है। इसके लिए कक्षावार शिक्षकों की तैनाती है। हालांकि कई जगह शिक्षकों की कमी होने से छात्र-छात्राएं को नियमित शिक्षा नहीं मिल पा रही है। कामचलाऊ व्यवस्था से काम चलाया जा रहा है।
जिले के जीजीआईसी उरई में परिधान रचना व सज्जा, आशुलिपिक व टंकण की व्यावसायिक शिक्षा दी जाती है। यहां पर प्रशिक्षकों की संंख्या पूरी है। जबकि जीआईसी में कंप्यूटर और नर्सरी टीचर्स ट्रेनिंग (एनटीटी) की ट्रेनिंग दी जाती है। इन दोनों कोर्स में एक-एक प्रशिक्षक की कमी है। आर्य कन्या इंटर कॉलेज उरई में पाकशास्त्र और लाइब्रेरी साइंस में भी एक एक प्रशिक्षक की कमी है।
एसआरपी इंटर कॉलेज कोंच में आटोमोबाइल, फोटोग्राफी, खाद्य प्रसंस्करण की ट्रेनिंग दी जाती है। यहां खाद्य प्रसंस्करण में एक प्रशिक्षक की कमी है। जीआईसी बंगरा में सचिवीय पद्धति और रेडियो एंड टीवी का व्यावसायिक कोर्स कराया जाता है। यहां रेडियो टीवी के व्यावसायिक कोर्स में एक प्रशिक्षक की कमी है। बुंदेलखंड इंटर कॉलेज माधौगढ़ में आशुलिपिक एवं टंकण और रेडियो एंड टीवी का कोर्स होता है। यहां आशुलिपिक के प्रशिक्षक की कमी है।
आर्य कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज कालपी में लाइब्रेरी, खाद्य प्रसंस्करण और पाक शास्त्र की पढ़ाई होती है। यहां खाद्य प्रसंस्करण में प्रशिक्षक की कमी है। सनातन धर्म इंटर कॉलेज उरई में बहुउद्देश्यीय कार्मिक एवं तकनीकी, छत्रसाल इंटर कॉलेज जालौन में टंकण की पढ़ाई होती है। यहां प्रशिक्षक पूरे हैं। श्रीराम इंटर कॉलेज पहाड़गांव में आटोमोबाइल, नर्सरी टीचर्स ट्रेनिंग के प्रशिक्षक पूरे हैं। जबकि डीएवी इंटर कॉलेज उरई में सचिवीय पद्धति और टंकण में एक एक प्रशिक्षक की कमी है। जीआईसी कदौरा में चार कक्षाओं में दी जाने वाली व्यावसायिक शिक्षा जीआईसी कदौरा जिले का एकमात्र ऐसा विद्यालय है। जहां पर कक्षा नौ, दस, कक्षा 11 और 12 में व्यवसायिक शिक्षा दी जाती है। यहां पर कक्षा 11 व 12 में फार्मेसी, बेकरी, फोटोग्राफी, आटोमोबाइल की ट्रेनिंग दी जाती है। जबकि कक्षा नौ और दस के विद्यार्थियों को रेडियो एवं टीवी और फोटोग्राफी की पढ़ाई की जाती है। यहां फोटोग्राफी में एक प्रशिक्षक की कमी है। जबकि अन्य विद्यालयों में कक्षा 11 और 12 के विद्यार्थियों के लिए ही व्यवसायिक कोर्स संचालित होते हैं।
वर्जन
समय-समय पर व्यावसायिक शिक्षकों के बारे में सूचनाएं शासन को अवगत करा दी जाती है। साथ ही शिक्षकों की कमी के बारे में भी अवगत करा दिया जाता है। शासन स्तर से शिक्षकों की स्वीकृति होते ही रिक्त पदों पर भर्ती कर दी जाएगी। -राजकुमार पंडित, डीआईओएस