उरई (जालौन)। ... इनसे टोल न लिया जाए! यह लाइन हर उस कार्ड में लिखी जाती थी जो विनायक कंप्यूटर के नाम से चल रही दुकान में बनाए जाते थे। टोल बचाने के उद्देश्य से लोग इस दुकान में संचालक से संपर्क करते थे। पुलिस को जो कार्ड मिले हैं, उनपर भी शिकंजा कसने के लिए पुलिस कार्रवाई करने की तैयारी में है। दूसरे दिन भी मुख्य आरोपी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा है। उसकी दुकान से पूर्व में रहे एक जिला जज का स्कैन किया हुआ हस्ताक्षर भी बरामद हुआ है। शनिवार को दुकान को सीज करने की कार्रवाई की गई। मुख्य आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर है।
प्रशासन को फर्जी कार्ड बनाए जाने की जानकारी करीब दो सप्ताह पहले मिल गई थी। टोल से भी ऐसी शिकायतें मिली थीं। डीएम राजेश कुमार पांडेय ने इसके लिए सीडीओ भीमजी उपाध्याय के नेतृत्व में टीम का गठन किया। सीडीओ के साथ सिटी मजिस्ट्रेट दिनेश कुमार, पीडी डॉ. शिवाकांत द्विवेदी शुक्रवार की देर शाम एसपी कार्यालय से चंद कदम दूरी और विकास भवन के मुख्य गेट के सामने खुली विनायक कंप्यूटर में छापा मारा। यहां से दो दर्जन से ज्यादा कार्ड बरामद किए गए। इसमें पुलिस, प्रशासन समेत अन्य सरकारी विभागों से जुड़ी मुहर व डीएम, एसपी आदि अधिकारियों के हस्ताक्षर किए कार्ड थे।
दुकान में इन अधिकारियों के साथ ही पूर्व में रहे एक जिला जज के स्कैन किए गए हस्ताक्षर भी मिले। कई कथित पत्रकारों के कार्ड भी बने हुए थे। सभी कार्डों में टोल नहीं लिए जाने वाली लिखी लाइन कॉमन थी। दुकान में मौके पर मिले एक व्यक्ति को पुलिस के हवाले कर दिया, जिससे पूछताछ की जा रही है। असली मालिक अभी पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया है। इसमें सरकारी कर्मचारियों के भी लिप्त होने की शंका जताई जा रही है। इसको लेकर जांच के लिए अधिकारी नियुक्त किया जाना है।
-पूर्व में रहे जिला जज समेत कई पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के स्कैन किए हस्ताक्षर मिले हैं। कुछ कथित पत्रकारों के भी कार्ड मिले हैं। इस मामले में जांच चल रही है।
दिनेश कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट
-इस मामले में जांच पड़ताल की जा रही है। मुख्य आरोपी को पकड़ने के बाद पूरे मामता खुलकर सामने आएगा। उसने किस किस के कार्ड बनाए हैं, यह भी पता चल जाएगा।
डॉ. ईरज राजा, एसपी