उरई। दुष्कर्म के दो अलग अलग मामलों में पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश मोहम्मद कमर ने दोषियों को सजा सुनाई। उन्होंने दोषियों को बीस-बीस साल और उनका सहयोग करने वालों को सात-सात साल की सजा सुनाई। दोषियों पर अलग-अलग जुर्माना भी ठोका है।
अभियोजन के अनुसार, कदौरा थाना क्षेत्र के एक गांव पिता ने पुलिस को बताया था कि 20 अगस्त 2017 को उसकी 16 वर्षीय बेटी इलाज कराने उरई आई थी। तभी प्रदीप अपने सहयोगी विनीत, संदीप की मदद से उसकी पुत्री को संकटा मंदिर से बहला फुसलाकर दिल्ली ले गया।
वहां प्रदीप ने उसके साथ दुष्कर्म किया। पिता की शिकायत पर पुलिस ने 24 अगस्त 2017 को प्रदीप को गिरफ्तार कर लिया था। शासकीय अधिवक्ता ब्रजराज सिंह राजपूत ने बताया कि इस मामले में अदालत ने प्रदीप को मुख्य दोषी मानते हुए 20 साल कैद और 85 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जबकि सहयोग करने वाले विनीत और संदीप को सात-सात साल कैद और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
वहीं, एक अन्य मामले में डकोर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी पिता ने पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि पांच अगस्त 2020 को उसकी 17 वर्षीय पुत्री को गांव का ही हरिशचंद्र रात में बहला फुसलाकर अपने साथ दिल्ली ले गया। किराये का कमरा लेकर साथ रखा और दुष्कर्म किया।
शासकीय अधिवक्ता बृजराज सिंह राजपूत ने बताया कि बुधवार को दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस, गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर पाॅक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश मोहम्मद कमर ने हरिशचंद्र को दोषी पाते हुए 20 साल की सजा सुनाई। साथ ही हरिशचंद्र पर 45 हजार रुपये अर्थदंड लगाया है।