उरई। रेलवे प्रशासन द्वारा रेलवे ट्रैक के मेंटीनेंस का काम यात्रियों पर भारी पड़ रहा है। आए दिन ट्रेनों के निरस्तीकरण होने से यात्री परेशान रहते हैं।
अब ग्वालियर से बरौनी और बरौनी से ग्वालियर जाने वाली छपरा मेल का निरस्तीकरण कर दिया गया है। तत्काल प्रभाव से हुए निरस्तीकरण के कारण कई यात्रियों ने नाराजगी भी जाहिर की और अपने टिकट वापस करवाए। रेल प्रशासन द्वारा उन्हें फुल रिफंड भी किया गया। वहीं, गोरखपुर से पनवेल एक्सप्रेस 15065 करीब सात घंटे देरी से चल रही है।
बता दें कि लखनऊ मंडल के बाराबंकी यार्ड में हो रहे ट्रैक मेंटीनेंस के काम के चलते 20 ट्रेनें प्रभावित हुई है। इसमें झांसी-कानपुर रेलमार्ग से गुजरने वाली छपरा मेल को 15 जनवरी तक निरस्त किया गया है। इसके अलावा गोरखपुर से मुंबई और मुंबई से गोरखपुर जाने वाली अंत्योदय एक्सप्रेस को 10 जनवरी तक निरस्त किया गया है। गोरखपुर से लोकमान्य तिलक जाने वाली एलटीटी एक्सप्रेस को 14 दिसंबर से 11 जनवरी तक निरस्त किया गया है। वहीं, गोरखपुर से हैदराबाद को जाने वाली ट्रेन 14 दिसंबर से 12 जनवरी तक प्रभावित रहेगी। इस ट्रेन का संचालन झांसी-कानपुर रेलमार्ग से तो होगा लेकिन यह ट्रेन गोरखपुर के स्थान पर लखनऊ के गोमतीनगर स्टेशन तक ही संचालित होगी।
छपरा मेल और अंत्योदय जैसी ट्रेनों के तत्काल प्रभाव से हुए निरस्तीकरण के कारण यात्री परेशान हुए। ट्रेनों के निरस्त होने पर यात्रियों ने अपने टिकट वापस करवाए।
मुख्य वाणिज्य निरीक्षक रमेश चंद्र ने बताया कि रेलवे प्रशासन की ओर से रेलवे ट्रैक का मेंटीनेंस का काम हो रहा है। इसलिए यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। ट्रेनों के निरस्तीकरण के चलते छपरा मेल के 16 यात्रियों ने टिकट रद कराई। जिन्हें फुल रिफंड कर दिया गया है।
उरई रेलवे स्टेशन के टिकट और पूछताछ खिड़की पर तैनात कर्मचारियों का रवैया ठीक नहीं है। कई यात्रियों का कहना है कि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी ठीक से जानकारी नहीं देते हैं। टिकट देने के बाद रिफंड कराए जाने पर आनाकानी करते हैं। रिजर्वेशन काउंटर पर बैठे मुख्य रिजर्वेशन सुपरवाइजर (सीआरएस) तो यात्रियों को आरक्षण फॉर्म देने में आनाकानी करते हैं। इसे लेकर उनके साथ कई बार विवाद भी हो चुका है और उनकी कई बार शिकायत भी हो चुकी है। यात्रियों ने सीआरएस को हटाने की मांग की है।
उरई। ट्रेनों के निरस्तीकरण और बसों के ज्यादा किराये के कारण यात्री परेशान हैं। जो इक्का-दुक्का ट्रेनें बची हैं, उनके टिकट के लिए मारामारी मची हुई है। मंगलवार को स्लीपर क्लास के लिए 40 यात्रियों के नंबर थे, लेकिन आठ टिकट ही नहीं बन गए। वहीं, एसी में 15 नंबर तत्काल के लिए लगे थे लेकिन पांच को ही तत्काल टिकट मिल पाया।