उरई। चिकित्सा प्रतिपूर्ति का मामला स्वास्थ्य विभाग के गले की फांस बन सकता है। चिकित्सा प्रतिपूर्ति के मामले में अब विजिलेंस जांच की सुगबुगाहट होने लगी है। जानकारों का कहना है कि चिकित्सा प्रतिपूर्ति का मामला गंभीर है। इसमें कई लोग नप सकते है। उधर, चिकित्सा प्रतिपूर्ति के मामलों की फाइलें अब तेजी से निपटाई जाने लगी है।
बता दें कि पेंशनरों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति के मामले लटकाने को लेकर पेंशनरों ने नाराजगी जताई थी। इस मामले को लेकर उन्होंने सीएमओ से भी शिकायत की थी। इस मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। इस पर डीएम राजेश कुमार पांडेय ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से इस मामले में जवाब भी मांगा था। जवाब से संतुष्ट न होने पर डीएम ने सीडीओ व सिटी मजिस्ट्रेट के साथ सीएमओ ऑफिस में छापेमारी की थी और सीएमओ व कथित रुप से चिकित्सा प्रतिपूर्ति का पटल देखने वाले लिपिक जफर को फटकार लगात हुए नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने पूरे मामले को शासन को अवगत कराने की बात कही थी। डीएम की सख्ती के कारण जिला अस्पताल और सीएमओ कार्यालय में लंबित फाइलें तेजी से निपटाई जाने लगी। उधर डीएम ने इस मामले में विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं। उधर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद अब इस मामले की विजिलेंस जांच की सुगबुगाहट तेज हो गई है।