उरई। शहर में नाला सफाई के कार्य में लगे कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डाल कर अपने काम को अंजाम दे रहे है। विभागीय लापरवाही के चलते इन कर्मचारियों को न तो सुरक्षा उपकरण दिए गए और न इन्हें सरकार के आदेशों की कोई जानकारी है। जबकि पालिका के अधिकारियों का दावा है कि सफाई कर्मचारियों को सफाई उपकरण दिए गए हैं। लेकिन नालों की सफाई के लिए उतर रहे सफाई कर्मचारी खुद की जान आफत में डाल कर अपनी ड्यूटी करने को मजबूर हैं।
मानसून आने से पहले शहर के अंदर नालों की सफाई के लिए पालिका 49 दिन का विशेष अभियान चला रही है। इसमें शहर के सभी नाले साफ होंगे। नाले सफाई के लिए पालिका ने इस बार अधूरी तैयारी की है। जिसकी वजह से सफाई कर्मचारी अपनी जान को जोखिम में डालकर बिना सुरक्षा किट के नाले में उतर रहे हैं।
नालों में पड़ी सिल्ट को कर्मचारी अपने हाथों से निकाल रहे हैं। इस दौरान उनके हाथ में न तो दस्ताने हैं और न उनके पैरों में जूते हैं। नाले की सफाई के नाम पर कर्मचारी अपने जीवन को दांव पर लगा रहे हैं। कर्मचारियो ने पालिका से सुरक्षा उपकरणों की मांग की थी लेकिन पालिका की तरफ से जीवन रक्षक किट, ग्लब्स, मास्क के लिए सिर्फ आश्वासन मिला है।
उत्तर प्रदेश सफाई मजदूर संघ के जिलाध्यक्ष संतोष कुमार ने बताया कि बिना सुरक्षा किट के सफाई कर्मचारी उतारे जा रहे हैं, जबकि इस पर रोक है। इसके बाद भी उनकी जान के साथ खिलवाड़ हो रहा है। इसको लेकर यूनियन विरोध करेगी। बिना सुरक्षा किट के कर्मचारियों को नाले में नहीं उतरने दिया जाएगा।
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बिना सुरक्षा किट के कर्मचारियों के नाले में उतारे जाने की जानकारी की जा रही है। अगर बिना किट के सफाई कर्मचारी काम कर रहे हैं तो इस पर रोक लगेगी। उन्हें सुरक्षा किट उपलब्ध कराई जाएगी। -गिरीशचंद्र, ईओ, नगर पालिका