उरई। बच्चों के टीकाकरण में जिले की स्थिति में सुधार हुआ है। यह सुधार समय-समय पर टीकाकरण के लिए चलने वाले अभियानों की वजह से दिख रहा है। हालांकि राष्ट्रीय फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) की रिपोर्ट में जो आंकड़े जारी किए गए हैं, उसके अनुसार अभी भी जिले में टीकाकरण की स्थिति में सुधार की गुंजाइश है। एनएफएचएस चार के मुकाबले पांच में एक साल से दो साल तक के बच्चों के टीकाकरण की स्थिति में सुधार हुआ है।
अपर शोध अधिकारी आरपी विश्वकर्मा ने बताया कि एनएफएचएस चार में जिले में टीकाकरण 54.7 प्रतिशत था। जो पांच में बढ़कर 66.2 प्रतिशत हुआ है। बीसीजी का टीकाकरण की स्थिति में भी सुधार हुआ है। एनएफएचएफ चार में टीकाकरण का प्रतिशत 85 था तो पांच में बढ़कर 90.3 प्रतिशत हो गया है।
सीएमओ डॉ. एनडी शर्मा ने बताया कि समय पर कराया गया टीकाकरण असरकारी होता है। यह लोगों का जीवन बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। सभी को जीवन रोधक टीके जरूर लगवाने चाहिए। खसरा रुबेला,टिटनेस,पोलियो,क्षय रोग, गलघोंटू, काली खांसी, हेपेटाइटिस बी के टीके लगाए जाते हैं। सीएमओ ने कहा कि टीकाकरण की अहमियत लोगों को कोरोना महामारी के दौरान सबसे अधिक महसूस हुई।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. डीके भिटौरिया बताते हैं कि गर्भवती और बच्चों को बीमारियों से बचाव और रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने के लिए टीके लगवाए जाते हैं। गर्भवती को टिटनेस का टीका जरूर लगवाना चाहिए ताकि नवजात को टिटनेस का खतरा न रहे। कहा कि किसी भी रोग की रोकथाम के लिए टीकाकरण सबसे सरल विधि है। टीका तभी असरदार होता है, जब उन्हें सही समय पर सभी कोर्स को पूरा किया जाए। यदि कोई टीका छूट जाए तो उसके लिए नजदीकी अस्पताल में जाकर टीकाकरण करा लें।
एमसीपी कार्ड देखें तो नहीं छूटेगा टीका
गर्भावस्था के रजिस्ट्रेशन के समय मातृ एवं बाल सुरक्षा कार्ड (एमसीपी कार्ड) दिया जाता है। इस कार्ड में गर्भावस्था के दौरान व प्रसव के बाद शिशु की संपूर्ण देखभाल को लेकर जानकारियां दी गई होती हैं। यदि लाभार्थी इस कार्ड के अनुसार ही चले तो कोई भी टीके नहीं छूट पाएंगे।