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Jalaun News: रातभर सोए नहीं आरोपी और बनाया भागने का प्लान

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आरोपी काली बोला साहब, बुखार है, ताला खुलते ही धक्का देकर हुए फरार
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संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा तो लूट के मामले में बंद अन्य आरोपियों के साथ उन्हें भी बंद कर दिया। लेकिन रात में काली उर्फ छोटू अपने साथी बच्चन के साथ सोया नहीं, बल्कि रात भर यही सोचता रहा कि यहां से कैसे निकले, इस पर दोनों ने प्लान बनाया।
काली सुबह पहरे पर तैैनात सिपाही हरवंत से बोला कि साहब रात भर बुखार चढ़ा रहा और सर्दी लग रही है, इसके साथ ही घबराहट भी हो रही है। इस पर संतरी हवालात के पास पहुंचा तो उसका साथी बच्चन बोला कि साहब यह सही कह रहा है। यह रात भर सोया भी नहीं है। जिस पर सिपाही ने जैसे ही गेट खोला तो काली उर्फ छोटू ने उसे धक्का दे दिया। जिससे सिपाही गिर गया और वह साथी के साथ दूसरे बंद गेट से फांदकर भाग गया।
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इसके बाद सिपाही मुंशियाने पहुंचा तो इसकी खबर उसने अपने साथियों को दी। जिससे कोतवाली परिसर में खलबली मच गई। पुलिस ने दोनों को खोजने का काफी प्रयास किया, लेकिन वह दूर जाकर कहीं छिप गए थे। जिससे पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा। लेकिन जैसे ही मामला लोगों के संज्ञान में आया तो पुलिस की सुरक्षा की पोल खुल गई। लोगों का कहना है कि जब पुलिस अपराधियों को भी नहीं रखा पा रही है, तो लोगों की सुरक्षा कैसे होगी।

बंद गेट से फांदे आरोपी, पुलिस बनी मूकदर्शक
उरई। आरोपी सिपाही को धक्का देकर कोतवाली के बंद गेट को फांदकर निकल गए। लेकिन कोई उन्हें नहीं पकड़ सका। पास ही सीओ कार्यालय भी है, जिसमें सिपाही के साथ-साथ गार्ड भी तैनात रहते हैं, लेकिन किसी की भी नजर आरोपियों पर नहीं पड़ी और वह आसानी से निकल गए। लोगों का कहना है कि कोतवाली परिसर में दर्जनों सिपाहियों की दिन भर चहलकदमी रहती है। लेकिन इसके बाद भी आरोपियों का आसानी से निकल जाना पुलिस की सक्रियता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश में चकरघिन्नी बनी है। लेकिन अभी तक आरोपियों का कोई पता नहीं लग सका है। (संवाद)
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घटना के समय एसएसआई रहे नदारद
उरई। कोतवाली परिसर में आने वाले फरियादियों की समस्या व अन्य कार्यों के लिए एक एसएसआई की तैनाती रहती है। शहर कोतवाली में हवालात के पास की एसएसआई की कुर्सी पड़ी रहती है। जहां से वह अपराधियों के साथ साथ अन्य कार्यों पर नजर रखे रहते हैं, जब आरोपियों ने सिपाही को धक्का दिया तब उस समय कोई भी एसएसआई कोतवाली परिसर में तैनात नहीं था। जिससे आरोपी आसानी से निकल गए। लोगों का कहना है कि अगर कोतवाली परिसर में एसएसआई मौजूद होते तो वह पुलिस कर्मियों को तुरंत अलर्ट कर देते और आरोपी भागने में सफल नहीं होते। (संवाद)
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