उरई। साहित्यिक संस्था पहचान की ओर से काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। डा. अमरेंद्र कुमार ने नफरतों के दौर में तुम प्रेम के दो बोल बोलो, मत किसी का दिल दुखाओ..रचना का स्वागत लोगों ने तालियां बजाकर किया। अन्य कवियों की रचनाओं का भी श्रोताओं ने आनंद लिया।
राजेंद्रनगर स्थित एक स्कूल में वरिष्ठ साहित्यकार यज्ञदत्त त्रिपाठी की अध्यक्षता में कवियत्री इंदु विवेक उदैनिया की वाणी वंदना और नईम की नाते पाक से गोष्ठी का आयोजन हुआ। शिवम सोनी ने जिंदा अपनी थोड़ी सी खुद्दारी रख, क्यों डरता है जंग बराबर जारी रख। दिव्यांशु दिव्य ने पढ़ा-जीवन में कोई आए या जाए, परवेज अख्तर ने मुझको अख्तर उस इंसा से कोई मुरव्वत कैसे हो, हिंद में रहकर दिल अपना जो रखे पाकिस्तान में.., पुष्पेंद्र पुष्प ने पढ़ा-मेरे दुश्मन ने फिर गर्दन झुका दी।
फरीद अली बशर ने पढ़ा- याद के बादल उठे और अश्क बरसाने लगे, मैं भरी बरसात में रोया तो सावन जल गया। नईम मिया ने पढ़ा-दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए, ये भी दस्तूर है निभाते रहिए। कवियत्री माया सिंह ने हमको इस दौर मे हर वक्त संभलना होगा, है खतरनाक सफर होश में चलना होगा।
अध्यक्ष शफीकुर्रहमान कश्पी ने पढ़ा-कमाल ये है कि खंजर जिन्होंने मारा था, वही ये पूछ रहे हैं कि घाव कैसा है। प्रेम नारायन दीक्षित ने पढ़ा- भाग्य भगवान की समीक्षा है, दर्द दे ले रहा परीक्षा है। इसके अलावा शायर फारूख वफा, विनोद गौतम, सुरेश चंद्र त्रिपाठी, मुहम्मद फराज, अभिषेक सरल, इंदु, शिखा गर्ग, सिद्धार्थ त्रिपाठी ने भी काव्य पाठ किया। अशोक होतवानी ने सभी अतिथियों व श्रोताओं के आभार व्यक्त किया।