विश्व होम्योपैथी दिवस पर विशेष
फोटो-6-अस्पताल में मरीज देखते होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डॉ विकास चतुर्वेदी। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति मीठी गोलियों वाली पद्धति है। इसमें असाध्य बीमारियों के ठीक करने की क्षमता है। यह विधि अस्थमा, एलर्जी, अर्थराइटिस जैसी बीमारियों से अच्छा काम करती है। त्वचा के मरीजों के लिए भी यह विधि मुफीद है।
जिला अस्पताल में तैनात होम्योपैथी चिकित्साधिकारी डॉ विकास चतुर्वेदी बताते है कि होम्योपैथी भी इलाज की एक पद्धति है। इसमें लोग अपना इलाज कराते हैं। वह कहते हैं कि होम्योपैथी दवाओं को छोटी-छोटी सफेद और मीठी गोलियों में मिलाकर दिया जाता है। हालांकि यह तरल रूप में भी मिलती है।
इसे लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है। इस दवा के सेवन से बीमारी को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। इनकी दवाओं के रखरखाव के लिए सावधानी बरतनी की जरूरत है। इसे सामान्य तापमान में रखना चाहिए। यही नहीं दवाओं के सेवन भी नियमानुसार करना चाहिए। जिस वक्त डॉक्टर दवा के सेवन के लिए कहे, उस वक्त ही दवा का सेवन करना चाहिए।
साथ ही जिस तरीके से दवा का सेवन करना चाहिए, वह तरीका भी अच्छी तरह से समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि दवा अच्छा असर करती है। हालांकि यह धीरे-धीरे अपना काम करती है। उन्होंने बताया कि लोगों का होम्योपैथी की ओर रुझान बढ़ा है। 2022-23 में करीब 16 हजार नए मरीज पंजीकृत हुए हैं। इसमें ज्यादा मौसमी बीमारियों, अर्थराइटिस, अस्थमा, एलर्जी, त्वचा संबंधी बीमारियों, बाल झड़ने संबंधी बीमारियों से ज्यादातर मरीज है।
दवा सेवन करने वाले यह बरतें सावधानी
-निर्धारित समय से अनुसार ही दवा का सेवन करना चाहिए।
-होम्योपैथिक दवाओं के इस्तेमाल के दौरान ध्रूमपान से बचना चाहिए।
-लहसुन का भी सेवन नहीं करना चाहिए।
-दवाओं का सेवन पुड़िया में ही करें। इसे छूना नहीं चाहिए।
-खाना खाने के पहले और खाने के बाद कम से कम बीस मिनट का अंतर होना चाहिए।
आज होगी गोष्ठी और लगेगा स्वास्थ्य शिविर
उरई। विश्व होम्योपैथी दिवस पर 10 अप्रैल को जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी कार्यालय में विचार गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। जबकि जिला अस्पताल स्थित जिला होम्योपैथी चिकित्सालय में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान अच्छा काम करने वाले चिकित्सकों को सम्मानित भी किया जाएगा।