उरई। शीत लहर ने पूरे जिले को कंपकंपा रखा है। पारा दूसरे दिन भी चार डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। गुरुवार को बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और चौराहे पर लोग अलाव तापते नजर आए। अधिकतम पारा 19 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
दिन की शुरूआत कोहरे के साथ हुई लेकिन नौ बजे कोहरा छंट गया पर धूप नहीं निकली। दोपहर करीब डेढ़ बजे धूप तो आई लेकिन वह गलन भरी सर्दी से लोगों को राहत नहीं दिला पाई। स्कूल कॉलेजों में अवकाश रहा। कुछ कोचिंग सेंटर खुले रहे। बहुत कम लोगों के बाहर निकलने के कारण बाजारों में कम भीड़भाड़ रही।
अस्पताल और स्टेशनों पर भी लोगों की कम आवाजाही रही। जरूरी न होने पर बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी यात्राएं स्थगित कर दीं। लोग जरूरी काम से ही बाहर निकले।
इस दौरान ऊनी कपड़ों की दुकानों पर भीड़ देखी गई। करमेर रोड स्थित तिब्बती ऊनी कपड़ों का मार्केट गुलजार रहा। रूम हीटर और अन्य शरीर को गर्म रखने के सामान की बिक्री में इजाफा हुआ है। मौसम वैैज्ञानिक पुरुषोत्तम कुशवाहा का कहना है कि अभी कुछ दिनों तक लोगों को कड़ाके की सर्दी से जूझना पड़ेगा।
उधर सर्दी को लेकर खेती किसानी करने वाले लोग खुश हैं। उनका कहना है कि इससे फसलों को फायदा होगा।
उरई। सर्दी के मौसम में तिल, गुड़, गजक के बाजार गुलजार हो गए हैं। बाजारों में गजक, मूंगफली की दुकानें सज गई हैं। गजक और लड्डुओं के दामों में पिछले साल के मुकाबले 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन सर्दी के साथ बिक्री बढ़ गई है।
सर्दी के मौसम में खाने के बाद कई लोग गजक पसंद करते हैं। ऐसे खाने वालों के लिए गजक की दुकानें जगह जगह सज गई हैं। गजक के साथ गुड़ के लड्डुओं की डिमांड भी बढ़ गई। पिछले साल के मुकाबले, गुड़, लाई, तिल के लड्डू, गजक और मूंगफली की गजक के दाम बढ़ गए हैं।
गजक और लड्डू की खरीद का प्रभाव भी पड़ा है। पिछले साल 60 रुपये की 250 ग्राम में बिकने वाली गजक इस बार 70 रुपये की 250 ग्राम में बिक रही है। मूंगफली भी 140 रुपये किलोग्राम से बढ़कर 180 रुपये किलोग्राम तक पहुंच गई है। इसी तरह लड्डू और तिल की बर्फी के दाम भी बढ़ गए हैं। दुकानदारों का कहना है कि सर्दी बढ़ने के साथ बिक्री भी बढ़ गई है।