उरई। जिले में चुनावी शोर मचा है। जिधर देखो उधर चुनाव की गूंज दिखाई दे रही है। चाय की दुकानों से लेकर चौराहों के जमघट तक जीत-हार की शर्त और अनुमान लगाए जा रहे हैं। लेकिन इस सब के बीच वोटरों का एक वर्ग ऐसा है जो चुनावी मुद्दों से सरोकार रखने के बजाय बस चुनाव चिह्न ही जानता है। प्रमुख सियासी दलों के चुनाव चिह्न को जेहन में रखकर विकास से उपेक्षित इलाकों के लोग इस बार मतदान में भाग लेंगे।
शुक्रवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने उरई विधानसभा के कोंच रोड व राठ रोड स्थित कुछ गांवों का भ्रमण किया तो विकास की राह देखते स्थानीय मतदाता प्रत्याशियों के नाम नहीं बता पाए, लेकिन किस चुनाव चिह्न पर उन्हें वोट देना है। यह बताने से वह नहीं चूके। उनका कहना है कि प्रत्याशियों के नाम से हमें क्या लेना हमें तो चुनाव चिह्न पता है। बस घर से मतदान केंद्र पर जाकर अपने चिह्न को देखकर बटन दबाना है।
उनका कहना है कि प्रत्याशी आएं चाहे नहीं आए चिह्न तो पता चल ही जाता है। वहीं, क्षेत्र के विकास के मुद्दे पर आज भी लोग इलाके की तस्वीर बदलने का इंतजार कर रहे है। जिले में 20 मई को होने वाले चुनाव के लिए प्रत्याशी पूरे दमखम से चुनाव में लगे हैं। चुनाव में लोगों के बीच क्या चल रहा है, इसके लिए हमारी टीम मड़ोरा, गढ़र व इमिलिया गांव पहुंची। जब ग्रामीणों से बात की तो पता चला कि कई ग्रामीण मतदाताओं को प्रत्याशियों के नाम पता नहीं है।
बोले, किस चुनाव चिन्ह को वोट देना है, यह वह भली भांति जानते हैं। ग्रामीण लाल सिंह से पूछा गया कि आपके लोकसभा क्षेत्र से कौन कौन प्रत्याशी है, तो वह बोले कि प्रत्याशी कोई भी हो लेकिन उन्हें किसे वोट देना है वह चिह्न के आधार पर जानते हैं। इसी तरह कई ग्रामीणों ने प्रत्याशियों के नाम बताए और कई नहीं बता पाए, लेकिन हवा कहां चल रही है, यह सभी जानते हैं।
इमिलिया गांव के वीरेंद्र कुमार ने बताया कि हर बार वोट करते है। प्रचार गाड़ियां आती है ंऔर क्षेत्र की तस्वीर बदलने की बात करती हैं। लेकिन आज भी कई मुद्दे ऐसे है जिनके लिए किसी भी सरकार ने कुछ नहीं सोचा। लाल सिंह बताते है हमारे गांव में 10 साल पहले खड़ंजा विछाया गया था। जो अब पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। बारिश के दिनों में यहां से निकलना दूभर हो जाता है। प्राथमिक स्वास्थ केंद्र में इलाज के नाम पर कुछ भी नसीब नहीं होता है। गांव में अगर कोई बीमार पड़ता है तो उरई के जिला अस्पताल का सहारा लेना पड़ता है या फिर झोलाछाप डाक्टरों से इलाज कराना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि अब कोई भी पार्टी मुद्दों पर बात नहीं करती है। बड़े-बड़े चुनावी नारों के शोर के साथ प्रमुख दलों के लोग गांव में घुसते है और बिना किसी ठोस मुद्दे पर बात किए बिना निकल जाते है। हमारी सुनने वाला कोई नहीं है। मतदान हमारी जिम्मेदारी है तो हम सभी निभाएंगे बस उम्मीद है कि शायद हमारे गांव की भी तकदीर संवर जाए। आज तक जो भी वायदे चुनाव के दौरान किए गए उनको पूरा नहीं किया है। ग्रामीणों का कहना है कि अब कर भी क्या सकते हैं, वोट तो देना ही पड़ेगा। चाहे कोई हमारे काम आए या नहीं।
जालौन गरौठा भोगनीपुर लोकसभा में मतदाताओं की स्थिति
- कुल मतदाता- 1995156
- पुरुष मतदाता- 1069420
- महिला मतदाता- 925629
- थर्ड जेंडर- 107
- कुल मतदान केंद्र 1798
- कुल मतदेय स्थल 2262