फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jalaun News: सर्दी में दिल घबरा रहा लेकिन जिला अस्पताल से नहीं कोई सहारा

विज्ञापन
विज्ञापन
उरई। जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट और फिजीशियन ही नहीं है।
विज्ञापन

सर्दी में हार्ट और बुखार के मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा होती है। बावजूद इसके, यह बड़ी समस्या झोलाछापों को फलने-फूलने में मदद कर रही है। नतीजा, गलत इलाज के कारण लोगों को जान जोखिम में डालनी पड़ रही है।
जिला अस्पताल में हार्ट का मरीज आते ही उसे कानपुर और झांसी का रास्ता दिखा दिया जाता है। यहां तक कि उसे प्राथमिक उपचार तक देने से बचाव किया जाता है। इसका उदाहरण है कि हाड़ कपाऊ ठंड में एक भी हार्ट पेशेंट का आंकड़ा जिला अस्पताल में दर्ज नहीं है।
विज्ञापन

जिला अस्पताल में प्रतिदिन 400 से 1200 तक की ओपीडी होती है। इसमें ज्यादातर बुखार, सर्दी, जुकाम व जोड़ों के दर्द के मरीज आते हैं। इसके अलावा हार्ट की समस्या के साथ भी कई मरीज आते हैं, लेकिन उन्हें मौखिक रूप से रेफर कर दिया जाता है। मुख्यालय के इस सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में इन दो महत्वपूर्ण चिकित्सकों में फिजीशियन के दोनों पद और कार्डियोलाजिस्ट का एक पद खाली है।
इसके अलावा दो एनेस्थेटिस्ट और चार ईएमओ के पद भी रिक्त हैं। रेडियोलॉजिस्ट का एक पद, चर्म रोग विशेषज्ञ नहीं है। आर्थो सर्जन का भी एक पद रिक्त है। सर्जन भी दो के मुकाबले एक है। ईएनटी सर्जन भी एक है। ऐसे में निजी अस्पतालों में जेब पर बोझ डालकर गरीबों को भी इलाज कराने को मजबूर होना पड़ रहा है। कुछ सरकारी इलाज की अपेक्षा से झांसी और कानपुर भटकने को मजबूर होते हैं।


एक्सीडेंटल केस को फौरन हैंडल करने के लिए ट्रामा सेंटर की सौगात दी गई, लेकिन ट्रामा सेंटर को मानक अनुसार 100 फीसदी चिकित्सकों की सौगात नहीं मिली। जहां ऑपरेशन को लेकर ज्यादातर मरीज पहुंचते हैं, वहां एनेस्थेटिस्ट ही नहीं है।
जनरल सर्जन के दोनों पद खाली हैं। आर्थोपेडिक सर्जन हैं, लेकिन ओटी टेक्नीशियन के तीनों पद खाली हैं। नर्सिंग असिस्टेंट के नौ में से एक भी पद नहीं भरा जा सका। लैब टेक्नीशियन के दोनों पद रिक्त हैं। एक्सरे टेक्नीशियन में तीन में से सिर्फ एक पद ही भरा है, इस वजह से लोड अधिक होने की दिक्कत होती है। स्टाफ नर्स में 15 में छह पद रिक्त हैं।

जिला अस्पताल और ट्रामा सेंटर में चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। आवश्यकता अनुसार, स्टाफ नहीं है। कोशिश रहती है कि सभी मरीजों को ठीक उपचार मिल जाए। पद भरने के लिए पत्राचार लगातार किया जा रहा है। -डॉ. अविनेश कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल




उरई। सर्दी की वजह से बुखार, खांसी, जुकाम के मरीज काफी संख्या में जिला अस्पताल में पहुंच रहे हैं। शुक्रवार तीन बच्चों समेत छह लोग बुखार के पहुंचे। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि सुबह कोहरा और दोपहर में धूप की गर्मी के बाद फिर रात में ठंड हो जाने से बीमार होने का खतरा रहता है। सर्दी से बचाव रखें। डाक्टर ने कहा कि धूप में बैठें, लेकिन ऊनी कपड़े उस वक्त भी जरूर पहनें।

उरई। कोहरे ने ट्रेनों की गति 110 से घटाकर 30 किलोमीटर प्रति घंटा कर दी है। सिंकदराबाद एक्सप्रेस शुक्रवार को स्टेशन पर आई ही नहीं। इसके अलावा अन्य ट्रेनें भी देरी से पहुंचीं। छह ट्रेनें रद रहीं। सबसे ज्यादा परेशानी गोरखपुर और मुंबई की ओर जाने वाले यात्री हुए।
ग्वालियर से बरौनी और बरौनी से ग्वालियर छपरा मेल, गोरखपुर से कोच्चिवैली राप्तीसागर एक्सप्रेस, मुंबई से गोरखपुर गोरखपुर एक्सप्रेस, यशवंतपुर से गोरखपुर जाने वाली गोरखपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस, झांसी से कोलकाता जाने वाली बैरकपुर एक्सप्रेस समेत छह ट्रेनें निरस्त रहीं। सिकंदराबाद से गोरखपुर जाने वाली ट्रेन 13 घंटे देरी से चल रही है।
शाम 7.45 बजे के स्थान पर शनिवार की सुबह 8.44 बजे उरई पहुंचने की जानकारी दी गई। अंत्योदय एक्सप्रेस पांच घंटा 54 मिनट, साबरमती एक्सप्रेस छह घंटा, पनवेल एक्सप्रेस छह घंटा, लखनऊ से झांसी पैसेंजर चार घंटा, झांसी से लखनऊ इंटरसिटी एक्सप्रेस दो घंटा 35 मिनट, कुशीनगर एक्सप्रेस एक घंटा 40 मिनट, गोरखपुर से मुंबई संत कबीरनगर एक्सप्रेस एक घंटा दस मिनट, सूबेदारगंज से सिकंदराबाद एक्सप्रेस तीन घंटा, लखनऊ से मुंबई पुष्पक एक्सप्रेस ढाई घंटा, मुंबई से लखनऊ पुष्पक सवा घंटा, सीतापुर से मुंबई एक्सप्रेस डेढ़ घंटा, गोरखपुर से पनवेल जाने वाली ट्रेन अनिश्चितकालीन देरी से चल रही है। पीआरओ मनोज कुमार सिंह का कहना है कि कोहरे के कारण ट्रेनें देरी से चल रही हैं। कुछ मंडलों में ट्रैक रखरखाव का काम भी चल रहा है। इससे दिक्कत आ रही हैं।

उरई। जिले का न्यूनतम तापमान शुक्रवार को इस सीजन में सबसे कम आंका गया। सुबह घना कोहरा और काफी गलन थी। सुबह साढ़े 10 बजे हल्की सी धूप निकली, लेकिन थोड़ी सी उम्मीद जागने के बाद फिर बदली छा गई। हालांकि दोपहर 12 बजे के बाद चमचमाती धूप निकली। पार्कों ओर खुली जगह में आकर लोगों ने धूप का आनंद लिया।
विज्ञापन

मौसम विभाग से कुलदीप गुप्ता ने बताया कि अधिकतम तापमान 16 और न्यूनतम तापमान छह डिग्री सेल्सियस रहा। उन्होंने बताया कि न्यूनतम तापमान में यह आंकड़ा अब तक का सबसे कम दर्ज हुआ है। सुबह आठ बजे तक सात डिग्री सेल्सियस तापमान था। दोपहर में धूप निकलने के बाद राहत हुई। उन्होंने बताया कि कोहरे का असर आगे भी अभी जारी रहेगा। मकर संक्रांति के बाद कुछ राहत मिल सकती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें