उरई। लंबे इंतजार के बाद शहर में एमआरएफ सेंटर शुरू हो गया है। पालिका अब शहर की गलियों से कचरा इकट्ठा कर शहर को स्वच्छ बनाएगी। इसके साथ ही कचरे से निकली प्लास्टिक को बेचकर अपनी आय भी बढ़ाएगी।
नगर पालिका शहर की आठ से दस हजार दुकानों और मकानों से पालिका कूड़ा उठाती है। इसमें प्रतिदिन 50 से 50 टन कूड़ा निकलता है। इसके लिए पालिका पर 20 से 25 लाख रुपये प्रति माह खर्च करता है। 400 के करीब कर्मचारी, 100 वाहन लगे हैं। इसमें सूखा, गीला और प्लास्टिक सभी प्रकार का कचरा रहता है। अब पालिका इस कचरे से निकलने वाली प्लास्टिक को बेचकर अपनी आय बढ़ाने की योजना बना रहा है। वह इसे कंपनियों की बेचेगा।
अधिशासी अधिकारी विमलापति ने बताया कि रोजाना औसतन 25 किलो सूखी प्लास्टिक मिलने का अनुमान है।
प्लांट चालू होने से कचरे का निस्तारण हो सकेगा। प्लास्टिक का प्रयोग हो सकेगा और उससे पालिका की आय में भी बढ़ेगी। प्लास्टिक बेचने के लिए कंपनी से करार किया जाएगा। इसके लिए उच्चाधिकारियों से भी परामर्श लिया जा रहा है।
विमलापति, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका
सेंटर के निर्माण में रहीं कई अड़चनें
पालिका ने वर्ष 2019 में एमआरएफ सेंटर को लेकर काम आगे बढ़ाया था। लेकिन, उसके बाद कभी बिजली कनेक्शन, तो कभी मशीन ठीक से काम नहीं करना और कभी मानक व कर्मचारी पूरे नहीं होने की वजह से इसे चालू नहीं किया जा सका। लेकिन, अब एमआरएफ सेंटर की मशीन को चालू कर दिया गया है।
बिल्सी में निकाली गई शोभायात्रा में शामिल झांकी। संवाद
बिल्सी में निकाली गई शोभायात्रा में शामिल झांकी। संवाद