डॉ प्रशांत भटनागर को सम्मानित करते प्राचार्य डी नाथ
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उरई। राजकीय मेडिकल कालेज के लेक्चरर थिएटर में मेडिकल एथिक्स सेमिनार आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि जीएमसी के प्राचार्य डॉ. डी नाथ ने कहा कि महामना मदन मोहन मालवीय काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रणेता तो थे ही इस युग के आदर्श पुरुष भी थे। वे भारत के पहले और अंतिम व्यक्ति थे जिन्हें महामना की उपाधि से विभूषित किया गया। पत्रकारिता, वकालत, समाज सुधार, मातृ भाषा तथा भारत माता की सेवा में अपना जीवन अर्पण करने वाले इस मालवीय ने जिस विश्वविद्यालय की स्थापना की। उसमें उनकी परिकल्पना ऐसे विद्यार्थियों को शिक्षित करके देश सेवा के लिए तैयार करने की थी। जो देश का मस्तक गौरव से ऊंचा कर सकें। वे आचरण पर केवल उपदेश ही नहीं देते थे बल्कि उनका पालन भी करते थे। उनके दिखाये हुए मार्ग पर चलते हुए छात्र-छात्राओं के शिक्षण प्रशिक्षण पर पूरा ध्यान देना है। पार्थ सारथी ने महामना के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए उनके कुशल नेता, समाज सुधारक, पत्रकारिता एवं शिक्षण के क्षेत्र में किए गए अभूतपूर्व कार्यों पर व्याख्यान दिया। डॉ. लता सचान ने ग्रेजुएट कोर्सेस में प्रारंभ में मेडिकल एथिक्स के महत्व पर चर्चा की। डॉ. अनामिका भारती,डॉ. प्रशांत भटनागर ने आभार व्यक्त किया। इस दौरान सीएमएस डॉ. आरके सिंह, डॉ. सुशीला खर्कवाल. डॉ. जीएस चौधरी आदि रहे।