उरई। एससी/एसटी एक्ट और जानलेवा हमले के मामले में दोष साबित होने पर एससीएसटी एक्ट अदालत के विशेष जज शिवकुमार ने छह लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उन पर 21-21 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। चार अन्य को तीन-तीन साल की सजा सुनाई गई। घटना 10 साल पहले जालौन के छिरिया सलेमपुर में हुई थी।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता हृदेश कुमार पांडेय ने बताया कि छिरिया सलेमपुर निवासी आलोक कुमार ने जालौन कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 22 नवंबर वर्ष 2012 को वह अपने घर पर लटके बेरी के पेड़ की डाल काट रहे थे।
तभी गांव के लाखन सिंह ने इसके विरोध में अपने भाई मलखान सिंह, शेर बहादुर, नरेश कुमार, राजेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, भतीजे बहोरन, नरेंद्र दरोगा और बेटा उमेश के साथ मिलकर लाठी, कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। जाति सूचक गालियां दीं। बचाने आए पिता सुरेश, मां कस्तूरी और बहन सोनम को भी पीटा। घटना में सभी गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी अत्याचार निवारण एक्ट शिवकुमार की अदालत में चल रही थी। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस और गवाहों के बयान होने के बाद कोर्ट ने लाखन सिंह, मलखान सिंह, शेर बहादुर सिंह, नरेश सिंह, बहोरन और दरोगा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अर्थदंड न देने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा राजेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह और उमेश सिंह को तीन-तीन साल की सजा सुनाई गई। मामले में विपक्षी अशोक कुमार और सुरेंद्र सिंह को भी तीन-तीन साल की सजा और नौ-नौ हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।