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Jalaun News: सुविधाएं बढ़ें तो सुधरें बदहाल औद्योगिक आस्थान के हालात

Wed, 29 Mar 2023 12:11 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
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कोंच। ब्रिटिश हुकूमत के वक्त से ही कोंच प्रमुख औद्योगिक केंद्र रहा है पर आज यहां का औद्योगिक आस्थान बदहाली की कगार पर है। यहां के उद्यमी शासन और प्रशासन से लगातार सुविधाएं बढ़ाने, औद्योगिक क्षेत्र में ढांचागत विकास कराने के लिए लगातार पत्र लिख रहे हैं, लेकिन धन की कमी का हवाला देकर यहां का विकास अवरुद्ध है। हालांकि काफी जद्दोजहद के बाद उद्योग क्षेत्र में नाली, सड़क आदि बनाने के लिए सात करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है, लेकिन अभी विकास कार्य शुरू नहीं हो सके हैं।
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लगभग 20 एकड़ में फैले औद्योगिक आस्थान में ए श्रेणी के चार, बी श्रेणी के पांच, सी श्रेणी के 19 और डी श्रेणी के 31 भूखंड उद्यमियों को आवंटित किए गए हैं। विभिन्न कारणों के चलते इनमें से 14 इकाइयां ठप पड़ी हैं। तीन इकाइयों को किराये पर उठा दिया गया है, जबकि तीन का मामला कोर्ट में विचाराधीन है।



वर्ष 1989-90 में जब औद्योगिक आस्थान शुरू हुआ तब यहां के उद्यमियों ने उद्योग लगाने में खासी दिलचस्पी दिखाई थी। धीरे धीरे स्थितियां गड़बड़ा गईं। एक-एक करके इकाइयों में ताले पड़ने शुरू हो गए। आज की स्थिति में औद्योगिक आस्थान की हालत काफी खराब है। औद्योगिक क्षेत्र के ढांचागत विकास के लिए उद्यमी अनिल पटेल लंबे समय से अधिकारियों और शासन के प्रतिनिधियों से संपर्क कर लगातार प्रयास कर रहे हैं। काफी लंबे समय बाद नाली, सड़क और चहारदीवारी बनाने के लिए सात करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। अब इस क्षेत्र की स्थिति जल्द सुधरने की उम्मीद जताई जा रही है। औद्योगिक आस्थान क्षेत्र में बिल्डिंग मैटीरियल के जगह-जगह ढेर लगे हैं। जहां फैक्ट्रियां लगनी चाहिए, वहां पर खानाबदोश जीवन जीने वालों की झोपड़ियां बन गईं हैं।
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24 घंटे बिजली और सुधरे यातायात से बदलेगी सूरत

उद्यमियों का मानना है कि जब तक उद्योगों को 24 घंटे बिजली नहीं मिलेगी तब तक स्थिति बदलने वाली नहीं है। उद्योगों को 24 घंटे बिजली देने के लिए अलग फीडर की व्यवस्था करनी होगी। इसके अलावा बेहतर यातायात व्यवस्था न होने से भी काफी परेशानी होती है। सरकार ने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे तो बना दिया पर कोंच पहुंचने के लिए अभी भी सिंगल रोड है। कोंच तक के लिए सड़क यातायात सुधारने की सख्त आवश्यकता है। ब्रिटिश हुकूमत के दौरान यहां शटल ट्रेन में मालवाहक डिब्बे लगकर जाते थे। शटल ट्रेन आज भी कोंच जाती है, इसमें भी मालवाहक डिब्बे लगाए जा सकते हैं, जिससे उद्यमियों को सहूलियत हो सके। यहां माल डिपो भी बना हुआ है, लेकिन उस पर कब्जा हो गया है। इसके अलावा बैंकों का अपेक्षित सहयोग न मिलने के कारण उद्योग धंधे स्थापित करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बैंकिंग व्यवस्था में सुधार की जरूरत है, जिससे छोटी इकाइयों को समय से ऋण प्राप्त हो सके।
बंद हो रहीं दाल और तेल मिलें



इस इलाके में दलहनी और तिलहनी फसलें बहुतायत में उगाई जातीं हैं। इस वजह से यहां पर दाल और तेल मिल भी खूब फल-फूल रहे थे लेकिन लेकिन कुछ समय से पैदावार में आई गिरावट की वजह से दाल मिल और तेल मिल नहीं चल पा रही हैं। हालांकि मटर प्रोसेसिंग प्लांट लगाए जा रहे हैं पर वर्तमान में मटर की पैदावार को देखते हुए फ्रोजन प्लांट की आवश्यकता है। औद्योगिक क्षेत्र में कुछ आइस फैक्टरियां, सीमेंट के पाइप बनाने वाली यूनिट के अलावा फर्टिलाइजर बनाने की भी यूनिट है।

वर्जन

उद्योग चलाने के लिए तो सबसे पहले 24 घंटे बिजली की जरूरत है। सरकार ने नियम बना दिया तहसील स्तर पर 18 से 20 घंटे बिजली दी जाएगी, इससे उद्योग कैसे पनपेंगे। इसके अलावा यातायात की भी बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए। छोटे उद्योगों को यदि बढ़ावा देना है तो बैंकिंग व्यवस्था में भी सुधार की जरूरत है। -अनिल पटेल, अध्यक्ष कोंच उद्योग ऑनर्स वेलफेयर सोसाइटी।
कोंच औद्योगिक आस्थान के विकास के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जो भी उद्योग वहां बंद हो गए हैं, उनके संचालकों से संपर्क कर उनकी परेशानी दूर की जा रही है। वहां के विकास के लिए हाल ही में सात करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं, जल्द ही वहां की स्थितियों में बदलाव होगा। -प्रभात यादव, उपायुक्त उद्योग विभाग जालौन।
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