माधौगढ़। माधौगढ़ में चितौरा रोड पर संचालित होेने वाले अवैध हॉस्पिटल के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर स्वास्थ्य महकमा चुप है। इस अस्पताल में अवैध वसूली के कई आरोप लग चुके थे। अब नवजात और उसकी मां की मौत भी हो चुकी है। लेकिन अभी तक स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं किया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अवैध अस्पताल के मामले में स्थानीय पुलिस कार्रवाई करेंगी।
मां बेटी की मौत के बाद परिजनों के आक्रोश के बाद पुलिस ने अस्पताल संचालक के खिलाफ मामला दर्ज किया है। हालांकि अभी गिरफ्तारी नहीं हुई है। वैसे तो जिले में 35 पंजीकृत हॉस्पिटल संचालित हो रहे है, लेकिन कई हॉस्पिटल बिना पंजीयन के भी चल रहे है। उनमें एक बालाजी हॉस्पिटल था। जिसमें दस बेड थे। खास बात यह थी कि अप्रैल माह से हॉस्पिटल का संचालन हो रहा था पर स्वास्थ्य विभाग ने इसे देखने तक की जहमत नहीं उठाई। अस्पताल में मां बेटे की मौत के बाद अधिकारियों का उनका कहना था कि उन्हें हॉस्पिटल की जानकारी ही नहीं थी। जबकि उनकी जिम्मेदारी होती है कि कोई भी झोलाछाप या फर्जी अस्पताल क्षेत्र में संचालित न होने पाए।
केस-1-
रामपुरा निवासी महिला संगीता का कहना हैं कि प्रसव के दौरान रामपुरा अस्पताल में भर्ती किया गया। अस्पताल में प्रसव के दौरान परेशानी होने पर रेफर कर दिया गया। अस्पताल में तैनात एक एएनएम ने कहा था कि माधौगढ़ में चितौरा के पास नया अस्पताल खुला हैं, डाक्टर को दिखा देना।
केस-2-
चितौरी निवासी जानकी रजबधिया का कहना हैं कि गर्भवती पुत्री को बालाजी अस्पताल के डाक्टर ने सुरक्षित प्रसव का आश्वासन दिया था। तीन दिन तक ब्लड, शुगर, बीपी की जांच की जाती रही। आखिर में पहले नवजात की मौत हो गई। इसके बाद पुत्री की भी की हालत बिगड़ गई। आननफानन उसे रेफर कर दिया, फिर उसकी मौत हो गई।
केस-3-
चितौरा निवासी पूजा विश्वकर्मा का कहना हैं कि अस्पताल में आने पर कर्मचारियों ने प्रसव आसानी से कराने का आश्वासन दिया। फर्जी डाक्टर के झांसे में आकर अस्पताल में भर्ती हो गए। जांच के नाम पर दस हजार रुपये वसूल लिए गए। गांव के संभ्रांत लोगों के हस्तक्षेप के बाद प्रसव हो सका।
वर्जन
फर्जी अस्पताल संचालन रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग अकेले कार्रवाई नहीं करता है। इसमें एसडीएम व पुलिस की भी भूमिका होती है। स्वास्थ्य महकमा अस्पतालों के पंजीकरण का काम करता है। पंजीकरण के पहले निर्धारित मानक देखे जाते है। मानक पूरे होने पर ही पंजीकरण किया जाता है। -डॉ. एनडी शर्मा, सीएमओ जालौन