उरई। सप्ताह भर पहले हुई बारिश और ओलावृष्टि से किसान ठीक से उबर भी नहीं पाए थे कि मंगलवार को फिर बारिश और ओलावृष्टि हुई। आसमान से आफत बरसी और पंद्रह से 20 मिनट तक ओले भी गिरे। कई जगह सिर्फ बारिश हुई। इससे गेहूं, दाल, मटर, सरसों आदि की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है।
जिले में सबसे ज्यादा मटर और गेहूं की खेती होती है। डेढ़ लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में मटर और लगभग इतना ही गेहूं का उत्पादन किसान करते हैं। इसके बलावा 20 हजार हेक्टेयर में चना, मसूर, सरसों होता है। उसे भी नुकसान पहुंचा है। जिले में गेहूं भी करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर में बोया गया, जिसमें अधिकांश में बाली आ गई। ओला गिरने से वह बाली टूट गई और फसल गिर गई है। कोंच संवाद सहयोगी के अनुसार गांव भेपता, कमतरी, नरी व पहाड़गांव में ओलावृष्टि हुई है। इसमें सबसे ज्यादा पहाड़गांव में ओले गिरे हैं। इन गांवों में सूखी, मसूर, गेहूं, सरसों आदि की फसल को नुकसान हुआ है।
वहीं आटा संवाद सहयोगी के अनुसार हैदलपुर, अटरिया, सदारा, नूरपुर, नसीरपुर आदि में ओले गिरने से मटर, मसूर, चना, गेहूं को नुकसान हुआ है। मुहम्मदाबाद संवाद सहयोगी के अनुसार डकोर के बड़ा गांव में ओले गिरे। वहीं कुठौंदा, कुसमिलिया, मुहम्मदाबाद, डकोर, चिल्ली में बारिश का असर रहा। यहां मसूर और कटी पड़ी मटर की फसल को नुकसान पहुंचा। कालपी के संवाद सहयोगी के अनुसार तहसील क्षेत्र के महेवा ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम मंगरौल, कुटरा, महेवा, गढ़गवा, हर्रायपुर, पिपरौधा आदि दर्जनों गावों में ओलावृष्टि हुई। कदौरा संवाद सहयोगी के अनुसार डेरा बागी, उदनपुर, खुटमीली, कुश्मरा, बावनी, गररेही, पुरवा,चतेला, इटौरा बावनी, जमरेही, इकौना, निश्बापुर, रैला, मवई अहीर आदि गांवों में फसलों को नुकसान पहुंचा।
27जेएनडी13: मीटिंग को संबोधित करते हुए वक्ता। स्त्रोत संगठन