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Jalaun News: ठंड और बारिश से खतरे में आई चने और मटर की फसल, किसान चिंतित

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उरई/मुहम्मदाबाद। मौसम के मिजाज ने मटर और चने के किसानों को सदमे में डाल दिया है।
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फूल आ चुकी इन फसलों पर खतरा मंडरा रहा है। फूल झड़ने से उनकी पैदावार गिर सकती है। किसान अब धूप निकलने की दुआ कर रहे हैं, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों की माने तो सप्ताह भर तक सूर्य देव के दर्शन होना संभव नहीं लग रहा है।
जिला कृषि अधिकारी गौरव यादव ने बताया कि जिले में मटर, गेहूं, चना, मसूर व सरसों आदि काफी तादात में होती हैं। सर्दी का यह मौसम अधिकांश फसलों के लिए मुफीद है, लेकिन कुछ फसले हैं, जिनको नुकसान हो रहा है। जिले में 1.30 लाख हेक्टेयर में मटर की फसल होती है। इसमें 60 फीसदी तक स्टोर और करीब 40 फीसदी तक सब्जी के लिए मटर की खेती होती है। इस मौसम में सब्जी की मटर को नुकसान पहुंच रहा है। उसमें जो फूल आ गए हैं, वह बारिश की वजह से झड़ गए हैं। धूप निकलने पर दोबार फूल आएंगे, लेकिन पैदावार घट जाएगी।
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वहीं, जिले में चना करीब 20 हजार हेक्टेयर में होता है। अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में बोई जाने वाली यह फसल जिन किसानों ने अक्तूबर की शुरुआत में ही बोई होगी, उनकी फसल को खतरा है। इन फसलों में फूल आ गए हैं, बारिश से झड़ने की वजह से पैदावार घट सकती है। गेहूं, मसूर, सरसों के लिए यह मौसम फायदेमंद है।

मुहम्मदाबाद के किसान इस्लाम ने बताया कि बारिश की वजह से अर्किल मटर की फली मिट्टी से चिपक गई है। तुड़ाई का काम धीमा हो गया है। खेत गीले हैं, फलिया फूल कर फट सकती हैं। बाजार में फलियों के भाव कम रहने की वजह से चिंता हो रही है।


कुसमिलिया के किसान राहुल ने बताया कि बारिश की वजह से सफेद मटर और सरसों के फूल गिर रहे हैं। कोहरे और बूंदाबांदी से नुकसान हो रहा है। कोहरे व पानी की बूंदें ज्यादा समय तक फसलों की पत्तियों पर रहने से इसे नुकसान पहुंचा सकता है।



मुहम्मदाबाद के किसान अजीम ने बताया कि मौसम ऐसा ही रहा तो फसलों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। उत्पादन भी घट जाएगा। कोहरे की फुहार से पहले ही खेतों में नमी है। बूंदाबांदी होने से कहीं फसलों को फायदे की जगह नुकसान न हो जाए।

शुक्रवार सबसे ठंडा दिन रहा है। पूरे दिन धुंध रही और बूंदाबांदी से गलन बढ़ गई। ठंड बढ़ने से अधिकतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस, जबकि न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम वैज्ञानिक कुलदीप गुप्ता ने बताया कि अगले शुक्रवार तक इसी तरह मौसम रहने की आशंका है। अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से कम ही रहेगा। रात का पारा लुढ़कर पांच डिग्री सेल्सियस तक भी पहुंच सकता है। आने वाले बुधवार को बारिश की भी आशंका जताई जा रही है।

उरई। सर्दी की वजह से खांसी बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 200 के करीब ओपीडी हो रही है। इसमें फिजिशियन और बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में मरीजों की लाइन लग रही है। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि सर्दी बहुत ज्यादा होने से बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। ऊनी कपड़े पहनाएं। बिना वजह घर से बाहर न निकालें। नवजात बच्चों की देखरेख ज्यादा गंभीरता से करें। नहलाएं नहीं। गर्म चीजें खिलाएं। ठंडा पानी या अन्य चीज न खिलाएं। सर्दी से निमोनिया और कोल्ड डायरिया का खतरा हो सकता है।
उरई। कोहरे के चलते शुक्रवार को भी ट्रेनें देरी से पहुंचीं। शुक्रवार को गोरखपुर से पनवेल जाने वाली पनवेल एक्सप्रेस नहीं आई। यह ट्रेन शुक्रवार की शाम 5:34 बजे पहुंचनी थी। रूट बदल जाने और कोहरे की वजह से शनिवार तक उसके उरई पहुंचने की संभावना है।
लोकमान्य तिलक से छपरा जाने वाली अंत्योदय एक्सप्रेस एक घंटा 25 मिनट, अहमदाबाद से वाराणसी जाने वाली साबरमती एक्सप्रेस दो घंटा 32 मिनट, सिकंदराबाद से गोरखपुर जाने वाली सिकंदराबाद एक्सप्रेस 12 घंटा चार मिनट देरी से पहुंची। इसके अलावा ग्वालियर से बरौनी और बरौनी से ग्वालियर जाने वाली छपरा मेल, गोरखपुर से कोच्चिवैली जाने वाली राप्तीसागर एक्सप्रेस, मुंबई से गोरखपुर जाने वाली ट्रेन नंबर 11079, यशवंतपुर से गोरखपुर जाने वाली ट्रेन नंबर 22534 और झांसी से कोलकाता जाने वाली बैरकपुर एक्सप्रेस निरस्त रही।
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इससे यात्रियों को खासी परेशानी हुई। स्टेशन अधीक्षक का कहना है कि ट्रैक रखरखाव और कोहरे के कारण ट्रेनें निरस्त और देरी से आ रही हैं। जल्द स्थिति में सुधार होगा।
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