कोंच। ब्लॉक परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में गुरुवार को कथा व्यास स्वामी शिवशंकरानंद सरस्वती ने महारास, गोपी गीत और गोवर्धन पूजा के प्रसंग सुनाए। कथा व्यास ने कहा, गोवर्धन पूजा उस प्रकृति की पूजा है, जो जीवन दायिनी है। उन्होंने महारास को लेकर कहा कि आत्मा का परमात्मा से मिलन और एक भक्त का भगवान के प्रति ऐसा निश्चल प्रेम ही महारास है।
कथा व्यास ने बताया कि महारास बहुत ही मनोहर व प्रेम से परिपूर्ण है, जिसकी केवल कल्पना मात्र ही सबके हृदयों को भावपूर्ण कर देती है। इस तरह आत्माओं का परमात्मा से मिलन बहुत ही विचित्र है। कथा व्यास ने कहा, ब्रजवासियों को इंद्र की पूजा की तैयारियां करते देख गोपाल कृष्ण ने उन्हें इंद्र के बजाय उस गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए कहा, जो जीविकोपार्जन के लिए सब कुछ देता है।
ब्रजवासियों ने कृष्ण का कहना मानकर गोवर्धन की पूजा की तो इंद्र ने कुपित होकर प्रलयंकारी वर्षा कर ब्रजवासियों को परेशान किया। कृष्ण ने अपनी कनिष्का पर गोवर्धन धारण कर ब्रजवासियों की रक्षा की और इंद्र का गर्व चूर किया। अंत में कथा परीक्षित विरमा पटेल ने भागवत जी की आरती उतारी।