उरई। जिले में रिकार्ड दुग्ध उत्पादन करके गांव और जिले का नाम प्रदेश में रोशन करने वाली निशा को लखनऊ में दुग्ध मंत्री ने गोकुल पुरस्कार योजना के तहत 51 हजार रुपये देकर सम्मानित किया। परिजनों ने बताया कि लगातार दो वर्षों से उन्हें यह सम्मान मिल रहा है।
कुठौंद ब्लाक के छानी अहीर निवासी निशा 10 वर्षों से अधिक समय से दुग्ध उत्पादन समिति से जुड़ी हुई हैं। उनके यहां से प्रतिदिन 60 लीटर दूध दुग्ध समिति को जाता है। बताया कि उनके पास छह भैंसें और दो गाय हैं। उन्हें लखनऊ में सोमवार को पशु धन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने गोकुल पुरस्कार योजना के तहत सम्मानित किया। उन्होंने 51 हजार रुपये का पुरस्कार राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। निशा के बताया कि पति धर्मेंद्र खेती करने के साथ ही उनका सहयोग भी करते हैं। पराग सहकारी दुग्ध समिति के स्थानीय प्रभारी लल्लन सिंह का कहना है कि इन्होंने जिले में सर्वाधिक दूध पराग डेयरी को दिया है, इसके चलते ही उन्हें पुरस्कार प्राप्त हुआ है।
निशा बताती हैं कि उनके पास सभी भैंसे सामान्य प्रजाति की हैं। वह सभी मवेशियों का परिवार के सदस्य की तरह रखती हैं। समय-समय पर वह डॉक्टरों के परामर्श से एक निश्चित अंतराल पर टेबलेट और हर तीन माह में पेट के कीड़ों की दवाई दी जाती है। जिससे पशु की सेहत अच्छी रहे और दुग्ध उत्पादन में कमी न हो। निशा ने बताया कि उन्होंने अपनी सास मालती से ही पशुओं की परवरिश करना सीखा है। निशा के पति धमेंद्र ने बताया कि उनकी मां मालती के पास भी सात गाय हैं। जिनसे प्रतिदिन 40 से 50 लीटर दूध का उत्पादन होता है। उन्हें भी एक बार नंद बाबा पुरस्कार मिल चुका है। इसके तहत उन्हें 21 हजार रुपये नगद और प्रशस्ति पत्र मिला था।
पराग के स्थानीय प्रभारी लल्लन सिंह ने बताया कि नदीगांव के बावली निवासी सरोजनी पत्नी आनंद कुमार को इस वर्ष का नंदबाबा पुरस्कार मिला है। उन्हें नंदबाबा की मूर्ति और 21 हजार रुपये देकर सम्मानित किया गया है।