उरई। किसानों ने औद्योगिक कॉरिडोर के लिए जमीन देने से इन्कार कर दिया है। करीब 500 किसानों ने इसका हलफनामा भी प्रशासन को सौंप दिया है। इनका कहना है कि उनकी जमीन उपजाऊ है। इसी से उनका जीवन यापन होता है। जमीन देने से रोजी-रोटी का संकट हो जाएगा। किसानों ने डीएम कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन भी सौंपा है।
बुंदेलखंड को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए सरकार उरई के डकोर ब्लॉक में औद्योगिक कॉरिडोर बनाने जा रही है। इसके लिए ब्लॉक के करीब 700 किसानों की 600 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी हैं। सबसे ज्यादा भूमि टिमरों में करीब 300, डकोर में करीब 200 और कुसमिलिया में करीब 100 हेक्टेयर ली जाएगी। किसानों का कहना है कि यह जमीन बहुत ही उपजाऊ है और उनके जीवन यापन का एकमात्र जरिया है। किसानों का कहना है कि जमीन अधिग्रहित हो जाएगी तो कई परिवारों का जीवन यापन का जरिया खत्म हो जाएगा।
इनका कहना है कि वे उपजाऊ जमीन नहीं देंगे। सरकार को इस प्रोजेक्ट के लिए कम उपजाऊ या बंजर जमीन की तलाश करनी चाहिए। किसानों में शैलेंद्र, कुलदीप, वीरपाल, पंकज यादव, हरि किशोर राजपूत, अमित यादव, कृष्ण कुमार, आशीष, लाखन सिंह आदि शामिल रहे।
पांच साल से नहीं बढ़ा सर्किल रेट
किसानों की नाराजगी की दूसरी वजह पांच साल से जमीनों का सर्किल रेट नहीं बढ़ना भी है। किसान शैलेंद्र , हरिकिशोर, सुनील ने बताया कि वर्ष 2017 से तीनों गांव की कृषि भूमि का औसतन सर्किल रेट करीब साढ़े 11 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर है। जमीन का सर्किल रेट बढ़ना चाहिए, जबकि आसपास की ऐसी जमीनों के सर्किल रेट 50 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर से भी ज्यादा हो गए हैं। इतने कम दाम यदि सरकार जमीन ले लेगी तो उन्हें मुुआवजा भी कम मिलेगा। इस कारण वह कहीं जमीन भी नहीं खरीद पाएंगे।