उरई। शहर में नाला सफाई की सुस्त चाल कई मोहल्लों में जलभराव की वजह बन सकती है। सही ढंग से नाला सफाई न होने की वजह से बारिश में शहर के नाले उफान पर आ जाते हैं। जल निकासी का इंतजाम ठीक न होने की वजह से कई सालों से आधा दर्जन मोहल्लों के साथ शहर के मुख्य चौराहे जलमग्न हो जाते हैं। आचार संहिता की वजह से इस बार नाला सफाई का टेंडर भी नहीं हो सका। जिसके चलते शहर के कई बड़े नाले कूड़ा-कचरा से भरे पड़े हैं।
वैसे तो नगर पालिका नालों की सफाई के लिए विशेष अभियान चला रही है। लेकिन, यह अभियान अभी चुनिंदा जगहों पर ही पहुंच पाया है। जो बड़े नाले हैं,वह अभी भी गंदगी और अतिक्रमण की चपेट में हैं। जिनकी तरफ जिम्मेदारों की निगाह अभी तक नहीं गई है। जबकि 15 जून से आसपास कभी भी मानसून आ सकता है। इसके बाद नाला सफाई का काम रुक जाएगा और कई मोहल्ले जलभराव का शिकार हो जाएंगे।
शहर के अंदर छोड़े बड़े मिलाकर कुल 55 नाले हैं। इसमें से चार बड़े नाले हैं, जो पालिका की सूची में शामिल है। इन नालों को हर साल पालिका को मानसून आने से पहले साफ कराना होता है। ताकि शहर के अंदर बारिश का पानी मुसीबत न बन सके। लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है। नगर पालिका नालों की सफाई के लिए करीब 15 दिन पहले से अभियान चला रही है। इस अभियान में चुनिंदा वार्ड के नाले साफ किए जा रहे हैं। जिन्हें सभासद अपनी मर्जी से करवा रहे हैं। बडे नालों की सफाई न होने से जलभराव की समस्या विकाराल हो सकती है।नगर पालिका की सुस्त चाल देख कर लग रहा है कि बडें नालों की सफाई जल्द संभव नहीं है। अगर बड़े नालों की पालिका सफाई करेगी तो करीब एक माह का समय लगेगा।मनसून का समय करीब आने से पालिका के पास अब वक्त भी नहीं बचा है।
कई मोहल्ले कर रहे नाला सफाई का इंतजार
- उमरारखेरा, शांति नगर, इंदिरा नगर मोहल्ले से निकले नालों और इन से जुड़े मोहल्लों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इन मोहल्लावासियों से जब हकीकत जानी गई तो उन्होंने बताया कि कई सालों से नालों की सफाई नहीं हुई। हर साल हल्की बारिश में नाले उफान पर आ जाते हैं। पिछली साल भी करीब 500 घर प्रभावित हुए थे।
बिना अतिक्रमण हटाए कैसे होंगे नाला साफ
- शहर के अंदर बने अधिकतर नाले अतिक्रमण की चपेट में है। जिन के अंदर सफाई हो पाना बड़ा मुश्किल है। नालों के ऊपर किसी ने पक्का अतिक्रमण तो किसी ने सामान रखकर अतिक्रमण कर रखा है। नगर पालिका का दावा है कि नालों की सफाई हो रही है। लेकिन जिन स्थानों पर पालिका ने सफाई की है। उन नालों को ऊपर से कोई अतिक्रमण नहीं हटा है।अतिक्रमण न हट पाने की वजह से नगर पालिका ने खानापूरी करके आधे अधूरे नाले की सफाई कर दी।
समस्या को लेकर लोगों की बात-
उमरारखेरा निवासी पवन प्रजापति ने बताया कि कई बार इस नाले की सफाई के लिए मांग कर चुके हैं। नगर पालिका में भी शिकायत कर चुके हैं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उमरारखेरा सुमन ने बताया कि बारिश के समय हर साल कहीं बाढ़ आए या नहीं, लेकिन यहां जरूर आती है। उनकी दुकान पहले डूब जाती है। पहले नाला सफाई हो जाती थी तो ये समस्या नहीं आती थी। रामकुंड निवासी दीपक रायकवार ने बताया कि नाले में पानी की जगह सूखा कचरा भरा हुआ है। नाले के ऊपर से बिजली का अंडर ग्राउंड केबल भी निकला है। दो बार नाले में आग लग चुकी है। इसमें केबल भी क्षतिग्रस्त हुई है। अगर अबकी बार आग लगी तो केबल भी राख हो जाएगी। दीपक कुमार ने बताया कि नाले की सफाई नहीं होने से गंदगी से जीना दूभर है।पास में घर बना हुआ है। बदबू और मच्छरों से मोहल्ले के सभी लोग परेशान हैं। कई बार सभासद से कही लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
वर्जन-
नाले की सफाई के लिए इस बार कोई टेंडर नहीं होगा। इसके लिए पालिका के कर्मचारी काम कर रहे हैं। उन्हीं से नाले की सफाई करवाई जाएगी। जहां नाला सफाई बची है, उसे भी जल्द पूरा करवा लिया जाएगा। -गिरीशचंद्र, ईओ, नगर पालिका