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किशोर को अगवा कर मार डाला

Wed, 13 Apr 2016 11:02 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
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राजेश की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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ट्रैक्टर की साझीदारी टूटने के बाद बदला लेने के लिए एक युवक वहशी हो गया और उसने अपने रिश्ते के ही भाई को अगवा कर लिया और उसकी गला घोटकर हत्या कर शव को जंगल में दफना दिया। करीब 15 दिन पहले पिता ने गुमशुदगी दर्ज कराई थी। पुलिस ने जब जांच शुरू की तो शक की सुई आरोपी पर ठहर गई। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर कड़ाई से
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पूछताछ की तो वह टूट गया। उसने अपना अपराध कबूल कर मृतक के कपड़े व कंकाल बरामद करवा दिया। पुलिस ने उन्हें जांच के लिए भेजकर आरोपी पर अपहरण व हत्या की रिपोर्ट दर्जकर जेल भेज दिया। जानकारी के मुताबिक रामपुरा थाना व कस्बा निवासी हरिशंकर पाल ने 29 मार्च को थाना पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि उसका 13 वर्षीय पुत्र राजेश

पाल घर के दरवाजे से खेलते वक्त लापता हो गया। पुलिस ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्जकर जांच शुरू की तो शक परिजनाें पर ही हुआ। इस पर राजेश के ही परिवार के धीरेंद्र पाल को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की तो वह टूट गया और उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसने बताया कि उसके पिता ज्ञान सिंह व राजेश के पिता हरिशंकर ने
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कुछ दिन पहले साझे में ट्रैक्टर खरीदा था बाद में हरिशंकर ने ट्रैक्टर हड़प लिया। इसको लेकर दोनाें परिवाराें में रंजिश चलने लगी। इसी रंजिश में वह राजेश को 29 मार्च को घर के

बाहर से अगवा क र निनवाली रोड पर ले गया। वहां उसकी गला दबाकर हत्या कर दी और शव को मिट्टी में दबा दिया। पुलिस ने आरोपी धीरेंद्र की निशानदेही पर मृतक राजेश के कपडे़ व सिर बरामद कर कर आरोपी के खिलाफ अपहरण व हत्या की रिपोर्ट दर्जकर जेल भेज दिया।

अंध विश्वास ने ले ली किशोर की जान
किशोर के अपहरण व हत्या के मामले के तार तंत्र-मंत्र से जुडे़ हैं। आरोपी धीरेंद्र ने पुलिस को बताया कि हरिशंकर के ट्रैक्टर हड़पने के बाद लड़ाई हुई तो हरिशंक र ने तांत्रिक को घर बुलाकर पूजा पाठ करवाया था। इसके बाद उसके छोटे भाई की मौत हो गई थी। धीरेंद्र ने भाई की मौत का कारण तंत्रमंत्र को मान भाई की मौत का बदला लेने का भी मन बना लिया।

इस कारण भी उसने वारदात को अंजाम दिया। बताते चलें कि तंत्रमंत्र मन का धन है। इससे किसी की मौत नहीं हो सकती लेकिन फिर भी आरोपी ने इसे भी अपराध की वजह बना लिया।

मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल
15 दिनाें से पुत्र क ी राह देख रही मां का कलेजा तब फट गया जब उसे पता चला कि अब उसका लाल इस दुनिया में नहीं रहा। मां मुन्नी कभी आसमान को निहारती तो कभी राजेश का नाम पुकारते हुए अचेत हो जाती है। हरिशंकर भी उस घड़ी को कोस रहे थे जब उसने साझेदारी में ट्रैक्टर खरीदा था। पूरा परिवार कातिल को कोसते नहीं थक रहा है। पूरे गांव में मातम पसरा है।
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