जिला जेल से फिरौती व जान से मारने की धमकी की शिकायतों पर एसपी ने शनिवार की देर रात आला अधिकारियाें के साथ वहां छापा मारा। इस दौरान नौ मोबाइल, दस चार्जर, लाइटर ब्लेड व करीब 45 हजार रुपये नकद बरामद किए गए। इससे जेल के अंदर चल रही आपत्तिजनक गतिविधियों की पोल खुल गई। खास बात ये कि छापे के लिए अफसरों के
पहुंचते ही जेल की बिजली गुल हो गई जो आधे घंटे बाद सुचारु हुई। साथ ही करीब 20 मिनट बाद बैरक की चाबियां दी गईं। एसपी ने जेल प्रशासन को पत्र लिखकर कार्रवाई की संस्तुति भेजने की बात कही है। एसपी अशोक कुमार त्रिपाठी को जानकारी हुई कि जेल में निरुद्ध शातिर अपराधी मोबाइल का उपयोग कर लोगों को धमका रहे हैं। पेट्रोल पंप लूट
कांड के वादी को जेल में निरुद्ध अपराधी ने मुकदमा वापस न लेने पर जान से मारने की धमकी दी है। इस पर एसपी ने एक गोपनीय टीम बनाई। इसमें एडीएम आनंद कुमार, एसडीएम संजय कुमार, सीओ उरई जंगबहादुर सिंह, कोतवाल जेपी यादव के अलावा कई थानाें का फोर्स शामिल रहा। इस टीम को लेकर शनिवार की रात करीब नौ बजे एसपी खुद
जिला कारागार पहुंचे। अचानक आलाधिकारियों को देख जेल प्रशासन के हाथ पांव फूल गए। एसपी अशोक त्रिपाठी ने बताया कि आला अधिकारियाें पहुंचते ही जेल प्रशासन ने बिजली काट दी। करीब आधा घंटे बाद जब बिजली सप्लाई हुई तो टीम को बैरक की चाबी देर से दी गई। इसके बाद बैरक नंबर एक में पुलिस टीम पहुंची तो वहा मोबाइल का चार्जर
दीवार के बगल में पड़ा था। इसके बाद पुलिस ने टार्च से सर्च कर दो मोबाइल बरामद कर लिए, बंदियाें ने उनके सिम निकाल लिए थे। इसी तरह बैरक 3,5,7 मेें भी पुलिस को लाइटर, ब्लेड व बीड़ी माचिस आदि मिली। हत्या के मामले में निरुद्ध चुर्खी थाने के एक कैदी से करीब 32 हजार रुपये मिले। रुपयाें की बाबत उसने बताया कि अधिवक्ता को देना है। इसी
तरह दो अन्य कै दियाें से भी कई आपत्तिजनक चीजें मिलीं।एसपी ने बताया कि छापेमारी में नौ मोबाइल , दस चार्जर व लाइटर, माचिस ब्लेड आदि मिला है। इस पर एसपी व एडीएम ने जेल प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई। एसपी ने जेल में आपत्तिजनक सामग्री मिलने तथा जेल प्रशासन के सहयोग न करने की रिपोर्ट शासन व जेल के आलाअधिकारियों को भेजकर कार्रवाई की संस्तुति करने की बात कही है।
तय शुदा निरीक्षण में कुछ नहीं मिलता
जिला जेल के मासिक या फिर शासन के आदेश पर होने वाले निरीक्षण में कुछ आपत्त्तिजनक सामान नहीं मिलता है। ये एक बड़ा सवाल है। इस छापे के बाद तय हो गया है कि जेल प्रशासन मोटे फीलगुड के चक्कर में कैदियाें को जेल में लग्जरी सुविधाएं मुहैया कराता है।
जेल में हत्याएं तक हो चुकीं
-वर्ष 2004 को जिला जेल में ललितपुर के सपा नेता जगराम यादव वहीं के संजू बुंदेला हत्याकांड में जिला कारागार में निरुद्ध थे। उनको जेल में जहर देक र मारने की साजिश रची गई थी।
-28 जुलाई 2007 को माफिया डान मुख्तार अंसारी के गुर्गे प्रिंस अहमद निवासी गाजीपुर ने अपने साथी चुर्खी थाना क्षेत्र के गांव औंता निवासी नाजिर के साथ डिप्टी जेलर सुनील दत्त मिश्रा पर जेल में बम से हमलाकर लहूलुहान कर दिया था। इसके बाद जेल में गैंगवार हो गया था और अन्य कैदियाें ने दोनाें को पीट पीटकर मौत के घाट उतार दिया था।
- 14 अगस्त 2007 में जिला जेल में दहेज हत्या में निरुद्ध कैलिया थाना क्षेत्र के गांव बेडा निवासी सोबरन सिंह कुशवाहा ने जेल में उगाही से तंग आकर केरोसिन छिड़क कर आग लगाकर जान दी थी।
-कालपी कोतवाली के उसरगांव निवासी रामनारायण ने जेल में कला काटकर आत्महत्या का प्रयास किया था।
-उरई के मोहल्ला तिलक नगर निवासी गुड्डू ने जेल में जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किया था।
-सितंबर 2011 में माधौगढ़ निवासी राजवीर पांचाल ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
सर्विलांस टीम कर रही पड़ताल
जेल में मिले मोबाइल फोनों से किस-किस से बात की गई है, यह मोबाइल के ईएमआई नंबर से स्पष्ट हो जाएगा। इसके बाद जेल में निरुद्ध बंदियाें को संरक्षण देने वालाें का भी खुलासा हो जाएगा। पुलिस उनके भी खिलाफ कार्रवाई करेगी। सर्विलांस सेल पड़ताल में जुट गई है।