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पुलिस की सख्ती से उग्र हुई भीड़

Sun, 18 Dec 2016 11:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
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डीएम और डीआईजी जायजा लेते। - फोटो : अमर उजाला
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उरई। त्रयोदशी भोज में सम्मिलित होकर लौट रहे बाइक सवार पति, पत्नी व नाती को तेजरफ्तार डंपर ने अनियंत्रित होकर टक्कर मार दी। पौने एक बजे घटी इस घटना के बाद मौके पर धीरे-धीरे लोग इकट्ठा होने लगे। इस दौरान परिजन भी सूचना मिलने पर मौके पर आ पहुंचे। जैसे जैसे समय बीतता जा रहा था, घटना स्थल पर भीड़ बढ़ती जा रही थी। इसी बीच लोगों ने डंपर चालक का डंपर फूंक दिया और नारेबाजी करने लगे।
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मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझाना चाहा पर लोगोें का रुख कड़ा था। इसके बाद पुलिस ने भी कड़े लहजे में लोगाें को समझाना शुरू कर दिया। बस यही बात बिगड़ गई। लोग बेकाबू हो उठे और पुलिस के साथ नोकझोंक शुरू कर दी। थोड़ी देर मेें मामला हाथापाई तक जा पहुंचा। उधर पुलिस ने बेकाबू लोगोें को नियंत्रित करने के लिए लाठियां पटकनी शुरू कर दीं। इसे भीड़ और बेकाबू हो गई। पुलिस के लिए अब भीड़ को संभाल पाना मुश्किल होने लगा। पुलिस ने बेकाबू भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस के लाठीचार्ज करने व आंसू गैस के गोले दागने शुरू कर दिए। इससे लोग थोड़ी देर के लिए पीछे जरूर हटे पर थोड़ी ही देर बार एक बड़ी भीड़ पुलिस की ओर दौड़ पड़ी। लोग अपने हाथों में पत्थर आदि लिए हुए थे। बेकाबू भीड़ ने अब पुलिस पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। इस बार पुलिस को पीछे हटना पड़ा। पर थोड़ी ही देर में आस पास के अन्य थानों की पुलिस और पीएसी के मौके पर पहुंचने के बाद पुलिस ने एक जुट होकर एक बार फिर भीड़ को खदेड़ने का प्रयास किया। यह क्रम करीब 3 घंटे तक चलता रहा।

एसपी ने दिखाई सूझबूझ
उधर, वायरलेस पर लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहे एसपी भी मौके पर जा पहुंचे। उन्होंने साथी अधिकारियों से मामले की जमीनी हकीकत जानी और फिर सूझबूझ के साथ मृतक के परिजनों को लाने को कहा। पुलिसकर्मियों ने बिना कोई देर किए मृतक के परिजनों पुत्र संदीप व भतीजा शिवप्रताप सिंह जो पत्थरबाजी के दौरान घायल हो चुके थे, को एसपी के पास ला दिया। एसपी ने उनसे थोड़ी देर बात की और कहा कि इस स्थिति से किसी का भला होने वाला नहीं। उन्होंने संदीप व शिवप्रताप से पुलिस का सहयोग करने को कहा जिसके लिए वे तुरंत राजी हो गए। इसके बाद इन दोनों को साथ लेकर एसपी भीड़ के पास गए और लोगों को सांत्वना दी व समझाया बुझाया। हालांकि इस दौरान कुछ लोग नारेबाजी करते रहे पर स्थानीय लोगों के सामने आने पर मामला किसी तरह संभल गया। इस तरह करीब एक घंटे के बाद हालात पूरी तरह काबू में आ चुके थे।
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पुलिस की गाड़ी में शव को उठाया
मामला शांत होने के बाद पुलिस की गाड़ी में सभी शवों को उठाया गया। हालांकि शव इतने कुचल चुके थे कि उन्हें उठाना भी बढ़ा मुश्किल हो रहा था। एसपी राकेश सिंह ने बताया कि इन शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। हत्या का पूरा मामला स्पष्ट है इसलिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी स्पष्ट ही होगी।

एक घंटे बाद पहुंची पुलिस
उरई जालौन। जालौन में तीन लोगों की डंपर से कुचलकर मौत होने के मामले में पुलिस का लापरवाही भरा चेहरा एक बार फिर सामने आया। हादसा होने के बाद  एक घंटे तक डंपर से कुचलकर जय सिंह वहीं पड़े रहे। इस दौरान स्थानीय लोगों द्वारा डायल 100 को सूचना देने के बाद भी समय से यह गाड़ी वहां नहीं पहुंची। पुलिस को भी सूचना दी गई पर वह भी एक घंटे देरी से पहुंची जब वहां लोगोें का जमावड़ा लग गया।
   
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक डंपर की टक्कर से कुचलकर जयसिंह लगभग एक घंटे तक जीवित रहे। इस दौरान एक घंटे बाद जब मौके पर यूपी 100 पहुुंची तो इसके सिपाही वहां नहीं रुके। ये सिपाही वहां से सीधे आगे निकल गए और उन्हाेंने रुककर यह भी पूछना लाजमी नहीं समझा कि मामला क्या है, या घायलों को किस तरह अस्पताल पहुंचाना है। स्थानीय लोगों के मुताबिक वहां एंबुलेंस भी पहुंची लेकिन उसने भी गाड़ी को नहीं रोका और वह वहां से निकल गई। इससे वहां उपस्थित लोग काफी उत्तेजित हो उठे। इस बीच घटना स्थल पर जयसिंह पड़े रहे। उनके शरीर से खून बहता रहा। कुछ समय बाद उनकी मौत हो गई। स्थानीय लोगों की माने तो यदि पुलिस समय से आ जाती और जय सिंह को समय से अस्पताल पहुंचा दिया जाता तो शायद उनकी जान बच सकती थी।
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