दहेज लोभी दो पतियों को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। जालौन में दहेज में बाइक न मिलने पर पत्नी और मासूम को जिंदा फूंकने के मामले में एडीजे द्वितीय श्रीनाथ सिंह ने पति को उम्रकैद और सास-ससुर को दस-दस साल की सजा सुनाई है।
इसके अलावा तीनों पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। हमीरपुर में डेढ़ वर्ष पहले दहेज की मांग पूरी न होने पर पत्नी को फांसी पर लटकाकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पति को दोषी मानते हुए अदालत ने उम्रकैद व 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं, आरोपी बनाए गए मृतका के सास व ससुर को दोष मुक्त किया है।
जालौन कोतवाली क्षेत्र के गांव सुढ़ार सालाबाद निवासी शीला पत्नी मोहर को ससुराल वालों ने 20 दिसंबर 2012 को तीन माह के बच्चे के साथ जिंदा फूंक दिया था। शीला के मायके वालों ने बताया कि बेटी की शादी वर्ष 2011 मेें की थी। इसके बाद से ही ससुराल वाले अतिरिक्त दहेज की मांग कर रहे थे। पति मोहर सिंह दहेज में बाइक लाने के लिए आए दिन शीला की पिटाई करता था।
घटना वाले दिन पति ने सास शिवकली और ससुर लाल सिंह के साथ मिलकर पहले शीला को जमकर मारापीटा। शीला तीन माह के मासूम बच्चे को सीने से लगाए थी। ससुरालियों ने शीला को मिट्टी के तेल से नहलाकर बच्चे समेत जिंदा फूंक दिया। इससे दोनों की मौत हो गई थी।