दोस्त के साथ मिलकर पत्नी की हत्या करने के आरोपी पति और उसके साथी पर दोष सिद्ध हो गया। इस पर एफटीसी तृतीय नरेंद्र कुमार की अदालत ने दोनों को सश्रम आजीवन कारावास और 25-25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
सात जुलाई 2104 की रात जालौन कोतवाली के गांव सारंगपुर के प्रधान रामराज सिंह गुर्जर ने कोतवाली पुलिस को सूचना दी कि उनके गांव के बाहर खेत में 20 वर्षीय युवती का शव पड़ा है। उसकी सिर कूंचकर हत्या की गई थी। सूचना पाकर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन शव की पहचान नहीं हो पाई। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने शव की पहचान के लिए कई जिलाें की पुलिस से संपर्क साधा। इस पर पिता यशरीन निवासी हमीरपुर थाना ठठिया जिला कन्नौज ने शव की शिनाख्त अपनी बेटी नरगिस (20) के रूप में की।
उसने पुलिस को बताया कि बेटी का विवाह कानपुर देहात के रहीम नगर रसूलाबाद निवासी गुलमदार उर्फ बबलू के साथ 24 मार्च 2014 को किया था। शादी के बाद भी दामाद का किसी लड़की से प्रेम-प्रसंग था। उसने दोस्त के साथ मिलकर नरगिस की हत्या कर दी। पुलिस ने पति गुलमदार उर्फ बबलू को गिरफ्तार कर उससे कड़ाई से पूछताछ की तो वह टूट गया। बताया कि सात जुलाई को पत्नी नरगिस को इलाज के बहाने पुखरायां ले जाने की बात कहकर बाइक से ले गया।
रास्ते में मोहल्ले के दोस्त छोटे उर्फ प्रदीप को भी बाइक पर बैठा लिया। रात के अंधेरे में हरिपुरा और सारंगपुर के बीच खेतों में नरगिस की सिर कूंचकर हत्या कर दी। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर दोनों को जेल भेज दिया और आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। एफटीसी जज नरेंद्र कुमार तृतीय ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद दोनों आरोपियों को हत्या का दोषी पाया। दोनों दस साल सश्रम आजीवन कारावास और 25-25 हजार रुपये की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर एक-एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी। शासन की ओर से पैरवी शासकीय अधिवक्ता मोतीलाल पाल ने की।