उरई। नाबालिग बेटी से लगातार तीन साल दुष्कर्म करने वाले पिता को एडीजे द्वितीय ने शनिवार को साक्ष्यों केे आधार पर दोषी करार देकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने दुष्कर्मी पिता पर 5 लाख 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। सरकारी अधिवक्ता के मुताबिक ये जिले अभी तक का सबसे बड़ा जुर्माना है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार कुठौंद थाना क्षेत्र के एक गांव की युवती ने 14 मार्च 2016 को उरई कोतवाली में पिता के खिलाफ तहरीर दी थी। इसमें उसने पिता ने तीन साल से दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। पिता ने बेटी के साथ गांव में रहने के दौरान दुष्कर्म किया फिर उसे लेकर उरई शहर आ गया। यहां किराये पर मकान लेकर बेटी के साथ रहने लगा। उरई में भी उसने बेटी के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए। युवती ने किसी तरह पिता की हरकत की सीडी बना ली और उरई कोतवाली में शिकायत दी। इस पर पुलिस ने पिता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उसे जेल भेज दिया था। सरकारी अधिवक्ता बृराज सिंह राजपूत ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कराने के दौरान लड़की की उम्र 18 वर्ष थी। किंतु पिता लगातार तीन साल से उसका शारीरिक शोषण कर रहा था। इसके चलते पुलिस ने आरोपी पर पाक्सो एक्ट भी लगाया था। मुकदमे की सुनवाई एडीजे द्वितीय श्रीनाथ सिंह की अदालत में हुई। पीड़ित के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने शनिवार को आरोपी पिता को दोषी करा देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने दुष्कर्मी पिता पर 5 लाख 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। अधिवक्ता के मुताबिक जिले अभी तक इससे बड़ा जुर्माना किसी अन्य मामले में नहीं किया गया है।