कोटरा के बिनौरा गांव की हमीरपुर शाख नहर में बाइक समेत गिरे जीजा साले का 48 घंटे बाद भी कुछ पता नहीं चला। गोताखोरों ने उनकी बाइक ढूंढ ली है। गोताखोरों ने नहर में करीब दो किलोमीटर तक उनकी तलाश की। उधर पुलिस जंगल की तरफ भी तलाश में जुटी रही।
उरई के मोहल्ला सुशील नगर निवासी जितेंद्र कुमार वर्मा (25) पुत्र रामसिंह सोमवार को अपने चचेरे साले रविंद्र कुमार (25) पुत्र जवाहर सिंह निवासी मोहल्ला इंद्रनगर उरई के साथ बाइक से ससुराल कोटरा जा रहा था। उसके साथ ग्राम ऐंधा से रिश्तेदार चंद्रभान व देवेंद्र भी बाइक से जा रहे थे, जो उन दोनों से आगे निकल गए थे। शाम करीब सात बजे कोटरा के बिनौरा गांव स्थित हमीरपुर शाख नहर के पास बाइक नहर में जा गिरी। वे दोनों नहर में लापता हो गए। कोटरा न पहुंचने पर तलाश में निकले चंद्रभान को नहर किनारे जितेंद्र का जूता पड़ा हुआ मिला था। सुबह सूचना पर परिजन पुलिस को साथ लेकर नहर पर पहुंचे। गोताखोरों को बुलवाकर तलाश शुरू कराई गई।
एसडीएम सदर अक्षय त्रिपाठी व सीओ सिटी संतोष कुमार ने भी मामले की जानकारी ली थी। गोताखोरों को जितेंद्र का दूसरा जूता व मफलर पानी में मिला था। बुधवार की सुबह कालपी से गोताखोरों को बुलाया गया। काफी देर तलाश करने के बाद उन्हें नहर में पानी के अंदर बाइक पड़ी हुई मिली। जिसे ग्रामीणों की मदद से बाहर निकाला गया। वह बाइक जितेंद्र की निकली, जिसे देखकर परिजन फफक कर रो पड़े। गोताखोर जितेंद्र व रविंद्र की तलाश में नहर में करीब दो किलोमीटर तक तलाश करने निकल गए, लेकिन उन दोनों का कुछ पता नहीं चला। करीब 48 घंटे बीतने पर भी उनका पता न लगने से परिजन हताश हो गए। उधर शाम होते ही गोताखोरों ने भी अपने हाथ खड़े कर दिए। पुलिस भी नहर के किनारे जंगल में दोनों की तलाश में जुटी रही।
जितेंद्र व रविंद्र की तलाश में पुलिस हर संभव प्रयास कर रही थी। एसडीएम व सीओ सिटी पुलिस को मामले में कोई भी कसर न छोड़ने की हिदायत देकर आए थे। पुलिस ने रात में कोटरा से एक जेसीबी बुलाई, जिससे नहर की गिरी बाइक का पता लगाया जा सके। पुलिस का यह तरीका काम भी आया। नहर में पानी के अंदर खुदाई होने से मिट्टी में दबी बाइक बाहर आई। सुबह गोताखोरों के पानी में उतरते ही उन्हें बाइक नजर आ गई।
नहर में समाए जितेंद्र व रविंद्र की तलाश में प्रशासन व पुलिस कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता है। नहर फुल गेज पर चलने से पानी का बहाव काफी तेज है, जिससे गोताखोरों को भी तलाश करने में काफी परेशानी हो रही है। एसडीएम सदर अक्षय त्रिपाठी व सीओ सिटी संतोष कुमार ने बुधवार को भी वहां पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन नहर के पानी को कम कराने के प्रयास में लगा है। नहर को बंद कर व जगह जगह नहर में कट लगाकर पानी निकाले जाने की व्यवस्था की जा रही है।
गोताखोर जब नहर में पानी के अंदर जितेंद्र व रविन्द्र की तलाश कर रहे थे तो उनके परिजन आस लगाए नहर किनारे बदहवास हालत में बैठे रहे। वह लोग सिर्फ बेटों की सलामती की दुआ करते हुए एक टकटकी लगाए नहर की ओर निहारते रहे। जितेंद्र के पिता रामसिंह अपने बेटे के जूतों को हाथ में पकड़े और मफलर को सीने से लगाए नहर किनारे बैठेे आंसू बहाते रहे।
ठंड में पानी में उतरना भी दिक्कत का सबब बना हुआ है। थोड़ी थोड़ी देर में गोताखोर बाहर निकलकर अलाव का सहारा लेते और फिर पानी में उतर जाते। गोताखोरों को सबसे ज्यादा परेशानी शाम को हो रही थी। इसलिए सूरज ढलते ही गोताखोरों ने भी अपने हाथ खड़े कर दिए।
युवकों के बाइक समेत नहर में गिरने की खबर क्षेत्र में फैलते ही आस पास के कई गांवों के लोग नहर किनारे खड़े नजर आए। उनकी आंखों में एक तरफ युवकों के परिजनों की हालत देखकर दया भी दिख रही थी तो वहीं दूसरी ओर नहर विभाग की उदासीनता के चलते नाराजगी भी। ग्रामीणों का कहना है नहर के पुल पर रेलिंग लगवाए जाने की मांग की दफा की जा चुकी है, लेकिन विभाग ने उनकी एक न सुनी और हादसे दर हादसे होते चले गए।
जीजा साले की तलाश के लिए जब गोताखोरों ने हाथ खड़े कर दिए तो उनकी तलाश के लिए पीएसी फ्लीट कंपनी बुलाई गई है। यह कंपनी एट जिले से आई। नहर में स्टीमर के जरिए टीम ने युवकों की तलाश शुरू कर दी है। देर शाम तक नहर में स्टीमर दौड़ते रहे। टीम के आने से तलाश का दायरा भी बढ़ गया है। बुधवार को टीम ने नहर में करीब पांच किलोमीटर तक जितेंद्र व रविंद्र की तलाश की गई। हालांकि अभी तक टीम के भी हाथ खाली है। शाम ढलते ही टीम ने भी काम बंद कर दिया। सुबह से ही टीम उनकी तलाश शुरू कर दी जाएगी। टीम गुरुवार को करीब 10 किलोमीटर के दायरे में युवकों की तलाश करेगी।