खाद्य सुरक्षा और औषधि निदेशालय के निर्देश पर आईं विभागीय टीम ने शहर के
तुलसीनगर मोहल्ला स्थित मकान में अवैध रूप से गुटखा बनाने के धंधे का
भंडाफोड़ किया। पुलिस ने यहां सुपाड़ी, ब्रांडेड तंबाकू मिक्स गुटखा समेत
प्रिंटेड पाउच का भारी स्टाक बरामद किया। पुलिस ने बरामद माल की कीमत तीन
लाख 78 हजार 500 रुपये आंकी है। टीम ने झांसी रोड स्थित फर्म में भी छापा
मारा लेकिन यहां सब कुछ ठीकठाक मिला।
खाद्य सुरक्षा और औषधि निदेशालय
को प्रदेश के सात जिलों में निकोटिन मिला गुटखा अवैध रूप से बेचे जाने की
सूचना मिल रही थी। निदेशालय के निर्देश पर गठित छापामार टीम में फतेहपुर के
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी शैलेश दीक्षित, उन्नाव के खाद्य सुरक्षा
अधिकारी सुबोध कुमार व नरेंद्र कुमार शामिल थे। टीम ने
मंगलवार को उरई
आकर स्थानीय प्रशासन के साथ शहर में छापामार अभियान चलाया। सबसे पहले टीम
तुलसी नगर पर आशिक चौराहा स्थित मकान पहुंची। यहां नया रामनगर निवासी
रघुवर दयाल गुप्ता पुत्र रामस्वरुप अवैध रूप से गुटखा बनवा रहा था। मकान
में बाहर से ताला लगा था और अंदर मजदूर गुटखा बना रहे थे। गेट का ताला
तोड़कर मकान के
अंदर घुसी टीम ने अवैध गुटखा का भारी स्टाक बरामद किया।
करीब तीन घंटे चली कार्रवाई के दौरान टीम ने तंबाकु मिक्स सुपाड़ी का नमूना
भरा। छापे में छह कुुंतल 16 किलो तंबाकु मिक्स सुपाड़ी बरामद की गई। इसके
साथ आठ कुंतल 86 किलो राज ब्रांड सुपाड़ी भी बरामद की गई। इसका भी टीम ने
नमूना भर लिया। बड़ी मात्रा में राज देसी गुटखा के प्रिंटेड
पाउच भी मिले
है। टीम ने बरामद माल की कीमत तीन लाख 78 हजार 500 रुपये आंकी है। टीम ने
बरामद माल को सील कर नमूने जांच के लिए भेज दिए हैं। इसके बाद टीम रामनगर
स्थित शिव शक्ति ट्रेडर्स पहुंची। यहां फर्म के मालिक नीरज अग्रवाल ने टीम
को कागजात दिखाए। यहां किसी तरह की गड़बड़ी नहीां मिली। सिटी मजिस्ट्रेट
पीके सक्सेना ने बताया बरामद अवैध गुटखा सील कर जांच शुरू कर दी गई है।
प्रशासन की शह पर चल रहा अवैध धंधा?
खाद्य सुरक्षा और औषधि निदेशालय के निर्देश पर आई टीम को मिली सफलता से स्थानीय
प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। कहा जा रहा है जब निदेशालय को
जिले में चल रहे अवैध धंधे की जानकारी तो स्थानीय प्रशासन इससे बेखबर
क्यों रहा। कहीं प्रशासन की शह से तो अवैध धंधा नहीं चल रहा है।
कई
सालों से शहर में बड़े पैमाने पर अवैध गुटखा बनाया जा रहा है। इसे शहर के
अलावा पड़ोसी कानपुर, झांसी और मध्य प्रदेश के जिलों को सप्लाई किया जाता
है। अवैध रूप से लाखों रुपये का धंधा चलने के बाद भी प्रशासन कार्रवाई करने
से
कतराता रहा है। ऐसे में प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे है। मंगलवार
को हुई कार्रवाई के बाद यह भी सवाल उठ रहा है क्या आगे भी इस तरह कार्रवाई
हो पाएगी। क्या जिला प्रशासन अपने उपर उठ रही सवालों को गलत साबित करने के
लिए जिले से गुटखा माफिया का जाल खत्म कर पाएगा।