हत्या के मामले में निरुद्ध एक बंदी की जिला कारागार में तबियत बिगड़ गई। उसे जिला अस्पताल लाया गया जहां मंगलवार की देर रात उसकी मौत हो गई। सूचना पर पहुंते मृतक के भाई ने विरोधियाें व जेल प्रशासन पर जहर देकर भाई की हत्या करने का आरोप लगाया है। सुबह सिटी मजिस्ट्रेट पीके सक्सेना की मौजूदगी में पुलिस ने शव का पंचनामा
भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मुहल्ला राजेंद्र नगर निवासी प्रिंस अग्रवाल (30) पुत्र अशोक अग्रवाल पर आरोप है कि उसने अपने दो अन्य साथियाें के साथ मिलकर शहर के टाउनहाल के सामने एक युवक बल्ले अवस्थी की 1 मई 2012 को गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में पीड़ित पक्ष ने प्रिंस व उसके दो साथियाें के खिलाफ
कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। तत्कालीन कोतवाल सूबेदार सिंह ने आरोपियाें को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। तबसे वादी पक्ष की बेहतरीन पैरोकारी के चलते किसी भी आरोपी की जमानत नहीं हुई। प्रिंस के भाई दीपेश अग्रवाल का आरोप है कि मंगलवार को वह भाई से जेल में मिलने गया तो उसने मिलने से इंकार कर दिया। मैसेज भेजा कि
उसकी जमानत जल्दी कराए नहीं तो उसकी हत्या हो सकती है। आरोप है कि जेल प्रशासन ने विरोधियाें से मिलकर जहर खिला कर भाई की हत्या कर दी। इस बाबत सिटी मजिस्ट्रेट पीके सक्सेना ने कहा कि बंदी की मौत कैसे हुई है यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट से तय होगा। परिजन जो आरोप लगा रहे हैं उसकी भी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
नीला पड़ गया था शरीर
जिला अस्पताल के शव गृह से जब प्रिंस का शव निकाला गया तो उसके दोनाें हाथ लोअर के अंदर थे और उसका शरीर नीला पड़ चुका था। उसे देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता था कि उसकी मौत जहर खाने से हुई है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर जेल में जहर पहुंचा कैसे। भले ही जांच में कुछ आए कि उसे जहर खिलाया गया या फिर उसने स्वयं
जहर खाया हो। सूत्राें की मानें तो जेल प्रशासन की बेहद लापरवाही है और जेल में सामान सप्लाई करने वाले भी जेल में आपत्तिजनक सामान बेंचते हैं। पैसा देने पर कैदियाें को नशे के लिए शराब तक मुहैया करा दी जाती है।
कैदियाें ने किया खाने का बहिष्कार
बंदी की मौत के बाद कैदियाें ने बुधवार को खाना नहीं खाया। पेशी पर आए कैदियाें ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जेल में उनका बहुत उत्पीड़न होता है और बिना पैसा दिए उनसे काम कराया जाता है।
क्या है झंड का फंडा
सजायाफ्ता कैदी पूरी जेल को अपने इशारों पर चलाते है। जेल में निरुद्ध बंदियाें ने बाकायदा झंड वसूली जाती है। झंड का मतलब जेल में सुविधाआें का पैसा। झंड देने वाले बंदियाें से कोई काम नहीं कराया जाता और स्पेशल बैरक में रखकर उनके हिसाब से खाने पीने की सुविधा दी जाती है। सूत्राें की मानें तो बंदी से मिलने के बाद भी बंदी रक्षक
उनकी तलाशी लेकर पैसा छुड़ा लेते है। इसकी कई मर्तबा शिकायत बंदियाें ने कोर्ट से भी की जिस पर कोर्ट ने जेल प्रशासन को फटकार भी लगाई है। लेकिन कुछ दिनाें बाद वहीं ढर्रा लौट आता है।
बंदियों ने डीआईजी से सिपाही की शिकायत की
जिला जेल में बंदी की संदिग्ध हालात में मौत के मामले में कानपुर से आए डीआईजी जेल आरपी सिंह के सामने बंदियाें ने जेल में तैनात सिपाही संतोष पर कई संगीन आरोप लगाए। इस पर डीआईजी ने पूरे मामले की जांच कर सिपाही पर कड़ी कार्रवाई की बात कही है। उन्हाेंने बंदी प्रिंस की मौत की भी जांच की बात कहकर कार्रवाई की बात कही है।